हिंद महासागर में डूबा ईरानी जहाज,बीजिंग में मचा हड़कंप! क्या चीन की गर्दन पर कस गया ‘मलक्का’ का फंदा?

दुनिया भर के नक्शों पर अपनी 9-Dash Line खींचने वाले चीन के रणनीतिकारों को आज कल नींद नहीं आ रही है। वजह कोई डरावनी फिल्म नहीं बल्कि हिंद महासागर की लहरों पर उठी एक ऐसी गूंज है जिसने बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ की खिड़कियां हिला दी हैं। ईरानी युद्धपोत IRIS Dena का श्रीलंका के पास जलसमाधि लेना,दरअसल चीन की उस सबसे बड़ी दुखी सपने (Nightmare) का सच होना है,जिसे वे प्यार से ‘मलक्का डिलेमा’ कहते हैं।
- अदृश्य मेहमान और चीन का ब्लड प्रेशर
चीन को लगा था कि हिंद महासागर उनका अपना ‘स्विमिंग पूल’ है,जहाँ वे जब चाहें अपने जासूसी जहाजों को ‘मछली पकड़ने’ के बहाने भेज सकते हैं। लेकिन एक अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने बिना नॉक किए जिस तरह ईरानी जहाज को समंदर की गहराई का टूर करा दिया,उसने चीन के रडार सिस्टम की इज्जत पर पानी फेर दिया है।
चीन अब सोच रहा है कि अगर ईरान का सबसे आधुनिक युद्धपोत इतनी खामोशी से गायब हो सकता है तो उनके अपने खिलौनेनुमा विमानवाहक पोत क्या सिर्फ परेड में सजाने के लिए रह गए हैं?
2. मलक्का का ‘फांसी का फंदा’
चीन के लिए मलक्का जलडमरूमध्य हमेशा से एक ऐसी गर्दन रही है,जिसे जब चाहो मरोड़ा जा सकता है। अब तक चीन को लगता था कि वे BRI और CPEC के नाम पर सड़कें बनाकर इस फंदे से बच जाएंगे। लेकिन इस हमले ने समझा दिया कि:
- तेल का खेल: अगर हिंद महासागर में शिकारी घूम रहे हैं तो चीन के तेल टैंकर वहां से ऐसे गुजरेंगे जैसे कि बिल्ली के सामने से चूहा।
- रणनीतिक फेल: अरबों डॉलर खर्च करके बनाए गए पोर्ट और चौकियां धरी की धरी रह गईं,जब असली एक्शन शुरू हुआ।
- बीजिंग का नया रोना
इस घटना के बाद चीन के सरकारी अखबार (Global Times) संभवतः यह लिखेंगे कि ‘यह शांति के खिलाफ साजिश है।’ लेकिन सच तो यह है कि जो चीन दक्षिण चीन सागर में दूसरों की नावों पर पानी की बौछारें छोड़ता था,आज वह खुद भीग रहा है,खौफ के पसीने से!
निष्कर्ष: कागज का शेर और पानी का फेर
अंत में संदेश साफ है। चीन ने सोचा था कि वह दुनिया का नया थानेदार बनेगा,लेकिन हिंद महासागर के गहरे पानी ने बता दिया कि यहाँ का असली डॉन अभी भी वही है जिसके पास साइलेंट पनडुब्बियां हैं। चीन के लिए अब मलक्का का डर कोई किताबी बात नहीं बल्कि एक कड़वी हकीकत है।
“जब समंदर में शिकारियों का राज हो तो कागजी कश्तियों को बंदरगाह पर ही रहना चाहिए।
