आज की कविता

विश्व आदिवासी दिवस पर आज की कविता

जंगल के योद्धा हम तो जंगल के योद्धा हैं साहेबहमें डराना नहींजेल की सलाखों सेजब से जन्म लिए हैंतब से...

मैं बीजेपी नहीं जाऊंगा, डोली रख दो कहारो !!

आज की कविता मैं बीजेपी में नही जाऊंगा डोली रख दो कहारोमहीने दो महीने नही जाऊंगा डोली रख दो कहारोमैं...

मरने दो भूख से सालों को, कटने दो नामुरादों को ड्रिंक्स के बाद आपने खाया है आम,आप सोईये

आज की कविताब: सैफ़ के दो नज़्म बस आप सोईये नज़्म: 1 काट रहा है ज़बान तो ये निज़ाम, आप...

भूख के विरुद्ध, भात के लिये: किसान सभा का देशव्यापी प्रदर्शन 21 अप्रैल को

कोरोना महामारी और अनियोजित लॉक डाउन के कारण किसानों, ग्रामीण गरीबों, दिहाड़ी और प्रवासी मजदूरों तथा आदिवासियों के समक्ष उत्पन्न...

बाबा नागार्जुन का सवाल आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पहले था

गणतंत्र दिवस के अबसर पर आपको बधाई ! 'किसकी है जनवरी किसका अगस्‍त है ? कौन यहां सुखी है कौन...

तुम कब्र खोद सकती हो अपने अस्तित्व मिटाने वालो का शोषण का साम्राज्य चलाने वालो का

तुम कब्र खोद सकती हो अपने अस्तित्व मिटाने वालो का शोषण का साम्राज्य चलाने वालो का तुम कब्र खोद सकती...

अब तो मुश्किल है आजादी

फोटो-जिंगइन अब कैसे मिलेगी आजादी? तुम कहते थे लेंगे आजादी। किस किस से लोगे आजादी? हत्याओं से आजादी या हथियारों...

हत्यारे जब कविता लिखते हैं !

हत्यारे जब कविता लिखते हैं ! हमारे समय के अँधेरे में हत्यारों, दंगाइयों, बर्बरों और फासिस्टों के गिरोहों के सरगना...