आज की कविता

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मरने दो भूख से सालों को, कटने दो नामुरादों को ड्रिंक्स के बाद आपने खाया है आम,आप सोईये

आज की कविताब: सैफ़ के दो नज़्म बस आप सोईये नज़्म: 1 काट रहा है ज़बान तो ये निज़ाम, आप

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भूख के विरुद्ध, भात के लिये: किसान सभा का देशव्यापी प्रदर्शन 21 अप्रैल को

कोरोना महामारी और अनियोजित लॉक डाउन के कारण किसानों, ग्रामीण गरीबों, दिहाड़ी और प्रवासी मजदूरों तथा आदिवासियों के समक्ष उत्पन्न

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बाबा नागार्जुन का सवाल आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पहले था

गणतंत्र दिवस के अबसर पर आपको बधाई ! ‘किसकी है जनवरी किसका अगस्‍त है ? कौन यहां सुखी है कौन

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तुम कब्र खोद सकती हो अपने अस्तित्व मिटाने वालो का शोषण का साम्राज्य चलाने वालो का

तुम कब्र खोद सकती हो अपने अस्तित्व मिटाने वालो का शोषण का साम्राज्य चलाने वालो का तुम कब्र खोद सकती

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