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7 आदिवासी युवाओं को बिना कारण बताए उठा ले गई पुलिस, ग्रामीणों को फ़र्जी मुठभेड़ की आशंका

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भूमकाल समाचार

दंतेवाड़ा । जिले के गांव एटापाल थाना कटेकल्याण से 24 मई की शाम 7 बजे 7 आदिवासी युवाओं को डीआरजी के सिपाही अगवा करके ले गए ।

यह जानकारी प्रसिद्ध समाजसेवी हिमांशुकुमार ने अपने फेसबुक वॉल पर आज रात में दी है। हिमांशु जी ने बताया है कि इनकी कानूनी तौर पर कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है । इन सात आदिवासी युवाओं में 2 लड़कियां हैं जिसमें से एक नाबालिग है ।

गांव वालों ने हिमांशु से कहा है कि वे इसकी खबर सार्वजनिक कर दे, ताकि आज रात में इन आदिवासी युवाओं की पुलिस हत्या ना कर सके । अक्सर बस्तर में कई फर्जी मुठभेड़ के मामले में ऐसा ही होता है कि घर से पकड़कर आदिवासियों को पुलिस ले जाती है बाद में एक विज्ञप्ति जारी कर उसे मुठभेड़ का रूप दे दिया जाता है।

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हिमांशु कुमार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक तो परिवार के लोगों को हर गिरफ्तारी की सूचना उन पर लगाए गए इल्ज़ाम तथा पुलिस वालों के नाम और गिरफ्तारी की वजह बतानी जरूरी है । लेकिन बस्तर में संविधान कानून नियम सब की धज्जियां उड़ाई जा रही है । आदिवासियों की जिंदगी कीड़े मकोड़ों से भी ज्यादा बदतर बना दी गई है ।
नागरिक के अधिकार मानव अधिकार कानून और संविधान मजाक की चीज बनकर रह गई है ।

हिमांशु ने लिखा है कि डीआरजी पुराने नक्सलियों का समूह है, जिसे सरकार ने गठित किया है । सुप्रीम कोर्ट ने पुराने नक्सलियों से बंदूकें वापस लेने का आदेश दिया था । पहले इन्हें सरकार एसपीओ कहती थी, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद इनका नाम बदलकर डीआरजी कर दिया गया है । यह पुराने नक्सली कानून नियम संविधान किसी चीज को नहीं मानते गांव में जाकर मनमर्जी लूटपाट हत्या बलात्कार करते हैं ।

“अब यह सरकार की तरफ से हिंसा कर रहे हैं । इन्हीं लोगों ने कुछ समय पहले मेरा तथा अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का पुतला जलाया था ” हम अब नई सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करें और इन पुराने नक्सलियों से हथियार वापस ले ले । अगवा किए गए आदिवासियों की सूची संलग्न है ।

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