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पत्रकार रूपेश कुमार सिंह की मां ने कहा, मेरा बेटा खोलता था सरकार की पोल इसलिए किया नक्सली बताकर गिरफ्तार

rupesh kumar singh freelance journalist
रूपेश कुमार सिंह

रूपेश की मां ने जाहिर की आशंका कि सादे बॉण्ड व पेपर पर दस्तखत कराकर रूपेश कुमार के ससुर विशद कुमार और छोटे बेटे अंशु को भी फंसा सकती है पुलिस, वहीं रूपेश के भाई कुमार अंशु ने झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र में कहा मेरे भाई को गलत आरोपों में फंसा सकती है पुलिस…

जनज्वार। बिहार के डोभी-शेरघाटी में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए स्वतंत्र पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता रूपेश कुमार सिंह की मां हेमलता देवी ने आज 8 जून को प्रेस में बयान जारी कर कहा कि मेरे बेटे को गलत आरोपों में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा है कि 4 जून को मेरा बड़ा बेटा रूपेश कुमार सिंह अपने करीबी साथी वकील मित्र मिथलेश कुमार सिंह और ड्राइवर मोहम्मद कलाम के साथ सुबह आठ बजे घर से बिहार के औरंगाबाद के लिए निकला और शाम तक इनमें से कोई भी लौटकर वापस नहीं आया।

गौरतलब है कि रूपेश कुमार सिंह, मिथलेश कुमार और मोहम्मद कलाम को पुलिस ने नक्सली बताकर गिरफ्तार किया है। प्रभात खबर में छपी खबर के मुताबिक डीएसपी रवीश कुमार ने बताया कि अनुमंडल पुलिस को सूचना मिली थी कि हजारीबाग की ओर से डुमरिया के छकरबंधा में अपने संगठन एमसीसी के लिए कार से विस्फोटक लेकर आने वाला है। वरीय पुलिस अधिकारी की निगरानी में तत्काल टीम गठित कर एनएच दो स्थित डोभी मोड़ पर वाहन चेकिंग लगायी गयी और स्विफ्ट डिजायर (जेएच 24 इ 4435) से पुलिस ने विस्फोटक के साथ तीन नक्सलियों को गिरफ्तार किया।

बकौल डीएसपी रवीश कुमार रूपेश ने पूछताछ पुलिस के समक्ष कबूल किया कि वह नक्सली संगठन एमसीसी के लिए काम करता है। पुलिस का कहना है कि इससे पहले भी रूपेश तीन खेप विस्फोटक की सप्लाई कर चुका है। रूपेश की कार से पुलिस ने 15 बंडल डेटोनेटर, जिसमें हर बंडल में 25 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर होता है, के अलावा 32 पीस जिलेटीन स्टिक, नक्सली साहित्य, तीनों के पास से एक-एक मोबाइल फोन व एक अन्य चिप बरामद होना बताया है।

वहीं रूपेश की मां हेमलता देवी के मुताबिक रात 4 जून की रात 10 दस बजे के बाद रूपेश का मोबाइल भी स्विच ऑफ हो गया, जिसके कारण परिवार वाले तनाव में आ गये। 5 जून को परिवार वालों ने रामगढ़ थाने में उनकी गुमशुदगी की रपट भी लिखवाई, उसी दिन रामगढ़ पुलिस वाले रूपेश कुमार सिंह का वह मोबाइल जो घर पर था, यह कहकर अपने साथ ले गए कि दो घंटे में लौटा देंगे, जो अभी तक नहीं लौटाया गया है।

रूपेश की मां के मुताबिक 6 जून को पुलिस ने हमसे कहा कि उन्हें ढूंढने के लिए स्पेशल टीम बनायी गई है। परिजनों ने सोशल मीडिया पर भी यह खबर फैलाई। 6 जून की दोपहर को वकील मिथिलेश सिंह का कॉल आया कि वे लोग ठीक हैं, घर लौट रहे हैं, लेकिन वे लोग शाम तक नहीं लौटे तो घर वालों की चिंता और बढ़ गई। उसी दिन शाम को रामगढ़ पुलिस ने हमारे घर आकर इस बाबत पूछताछ की कि क्या वे लोग घर आए? साथ ही यह भी कहा कि जब वे लोग घर लौटें तो खबर कर देना। हम उन्हें ढूंढ़ने के लिए पूरी मेहनत कर हैं, मगर दूसरे दिन 7 जून की सुबह खबर छपी कि बिहार के ढोभी मोड़ से 6 जून को हार्डकोर नक्सली सहित तीन को गिरफ्तार किया गया है, जिनके नाम रूपेश कुमार सिंह, मिथलेश सिंह और मोहम्मद कलाम हैं।

रूपेश कुमार की मां कहती हैं, ‘इन तीनों की गिरफ्तारी के पीछे एक गहरी साजिश लगती है। पुलिस मेरे बेटे रूपेश को फंसा रही है। रूपेश कुमार सिंह के लेख कई चर्चित पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहते हैं। छात्रों के आंदोलन से लेकर मजदूर आंदोलन, किसान आंदोलन, उन पर प्रशासनिक दमन के बारे में लिखा है। उसकी रिपोर्टें सरकारी दमन की पोल खोल देती हैं, यही वजह है कि मेरे बेटे को फंसाया जा रहा है। रूपेश के लेपटॉप और मोबाइल भी पुलिस के पास हैं, जिनके साथ वह किसी भी तरह की छेड़खानी कर सकती है।’

यह संभावना इसलिये बनती है कि 7 जून की ही सुबह ढोभी थाना से बिहार पुलिस की टीम रामगढ़ पहुंच कर मेरे छोटे बेटे कुमार अंशु और रूपेश के ससुर विशद कुमार ‘पत्रकार’ को हमारे बोकारो स्थित आवास पर छापेमारी करने के नाम पर यह बोलकर ले गयी कि छापेमारी में बरामद होने वाले सामान की सूची पर इनकी गवाही चाहिए।

थाने से वापस लौटकर पेशे से पत्रकार विशद कुमार ने बताया कि उनका मोबाइल पुलिस ने ले लिया था और उन्हें छोड़ने से पहले सादे कागज और सामानों की सूची बिना दर्ज किये हुए कागज पर मुझसे व रूपेश के भाई अंशु से जबरन हस्ताक्षर करवाये गए। यह हस्ताक्षर और बॉण्ड बोकारो के सेक्टर 12 थाने के प्रभारी के चेम्बर में करवाया गया।

इस मामले में रूपेश की मां की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में में आशंका जाहिर ​की गयी है कि सादे बॉण्ड व पेपर पर दस्तखत कराकर विशद कुमार और अंशु को भी पुलिस फंसा सकती है। वहीं रूपेश के भाई कुमार अंशु ने झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम एक पत्र लिखा है और कहा है कि मेरे भाई को गलत आरोपों में पुलिस फंसा सकती है।

साभारः जनज्वार.कॉम

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