छत्तीसगढ़

ट्रेन की चपेट में आने से घायल मादा हाथी ने तोड़ा दम, वन्यजीव सुरक्षा पर उठे सवाल

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घरघोड़ा (रायगढ़)। औद्योगिक गतिविधियों और जंगलों के सिमटने का खामियाजा एक बार फिर बेजुबान वन्यजीवों को भुगतना पड़ा है। घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत चारमार गांव के पास मालगाड़ी की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुई एक मादा हाथी ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों में गहरा रोष है।


दस हाथियों का दल पार कर रहा था ट्रैक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कल रात लगभग नौ बजे दस हाथियों का एक समूह रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। इसी दौरान खरसिया की तरफ से धरमजयगढ़ की ओर कोयला लोड करने जा रही एक खाली मालगाड़ी की चपेट में आने से एक मादा हाथी बुरी तरह जख्मी हो गई। ट्रेन की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि हाथी का पिछला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसका एक पैर भी टूट गया।
रेस्क्यू में आई बाधा, बिलासपुर ले जाने से पहले थमी सांसें
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और डॉक्टरों की निगरानी में रेस्क्यू व उपचार कार्य शुरू किया गया। हालांकि, घायल हाथी का दल आसपास ही मौजूद था और लगातार वहां विचरण कर रहा था, जिसके कारण डॉक्टरों और रेस्क्यू टीम को इलाज करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हाथी की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए बिलासपुर रेफर करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन चोटें इतनी गहरी थीं कि उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
औद्योगीकरण और सिमटते जंगलों से बढ़ा मानव-हाथी द्वंद्व
इस घटना ने क्षेत्र में बढ़ रहे औद्योगीकरण, खनन और जंगलों के विनाश से उपजे संकट को एक बार फिर उजागर कर दिया है। लगातार कटते जंगलों के कारण हाथियों के प्राकृतिक रहवास खत्म हो रहे हैं, जिससे वे भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों की ओर रुख करने को मजबूर हैं। अपनी फसलों को बचाने के लिए ग्रामीणों द्वारा लगाए जाने वाले करंट के अवैध शिकार, हाईटेंशन तारों, दलदल और अब रेलवे ट्रैकों पर लगातार हाथियों की जान जा रही है।
हाथी कॉरिडोर योजना अब भी फाइलों में बंद
क्षेत्र के जानकारों और ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के सुरक्षित आवागमन और उन्हें रिहाइशी इलाकों से दूर रखने के लिए ‘हाथी कॉरिडोर’ (Elephant Corridor) बनाने की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही है। सरकार और प्रशासन द्वारा इस संबंध में कई बार योजनाएं बनाने की बात तो कही गई, लेकिन धरातल पर इसका कोई ठोस असर दिखाई नहीं दे रहा है। यदि समय रहते पुख्ता कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह द्वंद्व और भी भयानक रूप ले सकता है।


(रिपोर्ट: मनोज पाठक, छैडोरिया)

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