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कामर्सियल माइनिंग की सूची में शामिल फ़तेहपुर ईस्ट कोल ब्लॉक के प्रभावित गांव नरकारो एवं नेवार में भी मिला सामुदायिक वन संसाधन का अधिकार.

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आलोक शुक्ला


रायपुर । देरी से ही सही छत्तीसगढ़ में वन अधिकार मान्यता कानून 2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधनों को मान्यता देंने की प्रक्रिया शुरू हुई। 15 अगस्त को कई जिलों में ग्रामसभाओं को जिनके दावे पूर्व जमा थे या वर्तमान में करवाये गए हैं उनको मान्यता दी गई हैं। प्रदेश में लगभग 12 हजार से अधिक गांव की ग्रामसभाओं को उनके सामुदायिक वन संसाधन के अधिकारों को मान्यता दी जानी हैं।
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ में ग्राम नरकारो एवम नेवार को सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार को मान्यता मिली इसमे से ग्राम नरकारो कामर्सियल माइनिंग की सूची में शामिल फतेहपुर ईस्ट कोल ब्लॉक का प्रभावित गांव हैं।

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ये अधिकार पत्रक धरमजयगढ़ में जनसंगठन के साथी डी एस माल्या जी के प्रयास से हुआ। वहां के युवा sdm चौबे जी ने सकारात्मक भूमिका एवम उनकी पहलकदमी में इस प्रक्रिया को पूरा किया गया । हर स्तर पर उनके द्वारा प्रशासनिक सहयोग दिया गया और मुख्यमंत्री जी की मंशा अनुरूप इसके प्रभावी क्रियान्वयन में वो जुटे हुए हैं।

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ऐतिहासिक अन्याय को खत्म करने बनाये गए इस कानून के क्रियान्यवन के लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति और अधिकारियों की संवेदनशीलता व समझ आवश्यक है । रमन सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल में इस कानून की सिर्फ धज्जियाँ उड़ाई जाती रही।
हालांकि अभी भी समग्रता के साथ और अधिक समन्वयन आवश्यक हैं। तभी इस कानून के सही पालन से उस ऐतिहासिक अन्याय को खत्म किया जा सकता है जो आदिवासियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के साथ हुआ हैं।

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आलोक शुक्ला

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