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सिलेगर हत्याकांड की सच्चाई छुपाने भूपेश सरकार उतर आई पूरी बेशर्मी पर, पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, समाज के नेताओं को भी जाने से रोका

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कांकेर ( भूमकाल समाचार ) सिलगेर मामले में भूपेश जी तो रमन सिंह से भी ज्यादा निर्दयी निकले। देशभर में हल्ला मचा है उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा। आदिवासियों के नरसंहार पर अभी तक ना तो भूपेश बघेल ने संवेदना के दो शब्द कहे हैं और ना ही राहुल गांधी ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की है । इधर 3 आदिवासियों के मारे जाने को लेकर आदिवासियों का आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया है और आज 30,000 से ज्यादा बड़ी संख्या में आसपास के सैकड़ों गांव के लोगों के इकट्ठा होने की खबर है । जबकि घटनास्थल तक जाने की कोशिश कर रहे समाज और राजनीतिक पार्टियों के नेताओं और वरिष्ठ समाजसेवियों को अनाधिकृत तौर पर विभिन्न स्थानों पर रोके जाने की कोशिश की जा रही है ।

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पता चला है कि आदिवासी नेत्री सोनी सोरी को पिछले 7 दिनों से स्थानीय प्रशासन ने नियम के विरुद्ध उन्हें तरह-तरह का नोटिस देकर घर में ही कैद कर रखा है । वही घटनास्थल में fact-finding के लिए जाने की कोशिश कर रहे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध समाजसेवी ज्यां द्रेज और बेला भाटिया को पिछले 6 दिनों से लगातार बहाना बनाकर रोके जाने की कोशिश की जा रही है । इस बीच इनमें बीजापुर के एक रेस्ट हाउस में 2 रात तक अनाधिकृत तौर से बंद कर दिए जाने की भी खबर है । कल 21 मई को बेला भाटिया ने खुद ट्वीट कर जानकारी दी थी कि उन्हें भारी कशमकश के बाद सिलेगर जाने की अनुमति मिली है मगर आज की सूचना है कि उन्हें अभी भी जाने से रोका गया है । इधर एक अन्य सूचना के अनुसार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और आदिवासी नेता मनीष कुंजाम को भी पहले भैरमगढ़ में फिर बाद में बीजापुर में रोके जाने की खबर है ।

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इधर आप पार्टी के नेता देवलाल नरेटी ने भी फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से बताया है कि उन्हें और उनके साथियों को आज सुबह से कोड़ेनार थाना में बिठा कर रख लिया गया है और उनकी गाड़ी को भी थाने के भीतर कर लिया गया है उन्हें थाने के पुलिस अधिकारी ने बताया है कि ऐसा करने के लिए उन्हें रायपुर से आदेश मिला है ।

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यह सब करके भूपेश बघेल ने निश्चित रूप से यह संदेश दे दिया है कि वह भारतीय जनता पार्टी के पिछले 15 साल की सत्ता के अनुरूप ही आदिवासियों के खिलाफ चलेंगे । आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के लिए उन पर क्या दबाव है यह अब तक स्पष्ट नहीं हो चला है । इधर कुछ पत्रकारों ने भी आरोप लगाया है कि उन्हें भी कई अलग-अलग स्थानों से घटनास्थल में जाने से पुलिस ने रोका है और वापस कर दिया गया है । सवाल उठना लाजमी है कि भूपेश की सरकार की पुलिस और प्रशासन खेल खेल में 3 आदिवासियों की निर्ममता से हत्या करने के बाद आखिर और क्या गुंताडा करने में लगी हुई है जिसे वह पूरे देश से और अंतरराष्ट्रीय जगत से छिपाना चाहती है ?

इधर आंदोलनरत ग्रामीणों ने राज्यपाल श्रीमती अनुसुईया उइके को पत्र लिखकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं आदिवासियों पर गोली चलाई जाने और 3 आदिवासियों की निर्मम हत्या करने के मामले की उच्च स्तरीय जांच व कार्यवाही करने की मांग की है ।

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