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बस्तर में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित पैरा मिलिट्री के जवान ग्रामीणों ने संक्रमित जवानों के गांवों में सर्चिंग का किया विरोध

हजार से अधिक ग्रामीण, भय, विरोध और मांग

बीजापुर (भूमकाल समाचार) – जिले के तोड़का पंचायत में आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांव के 1000 से ज़्यादा आदिवासियों ने सभा कर केंद्र सरकार के एनआरसी और सीएए कानून का विरोध करते हुए जवानों से कोरोना फैलने का खतरा बताया । ग्रामीणों ने मांग की है कि संक्रमित जवानों का गांव में गस्ती बंद किया जाय। इस आंदोलन में आदिवासियों की एक प्रमुख मांग प्रदेश और केंद्र सरकार पर आदिवासियों के हिंदू करण करने के खिलाफ भी था ।

ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले ही माओवादियों ने परिचय फेंक कर और विज्ञप्ति जारी कर बस्तर में पदस्थ अधिकांश पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों के कोरोना संक्रमित होने का आरोप लगाया था । अब इसी आरोप पर बस्तर के बीजापुर के सुदूर माओवादी प्रभावित ग्राम तोड़का में 6 गांवों के बूढ़े, बच्चे, महिलाएं, हाथों में बैनर पोस्टर लिए विरोध करते नज़र आये । आदिवासी समुदाय का कहना है एनआरसी के कारण पूरे देश के नागरिकों की नागरिकता पर खतरा है । उन्होंने एनआरसी, हिंदुत्व और कोरोना पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उनकी आवाज़ मीडिया के ज़रिए सरकार तक पहुंचनी चाहिए ।

ग्रामीणों ने अपने इस आंदोलन के दौरान लाल रंग की जगह पर काले रंग के बैनरों का इस्तेमाल किया । इन बैनरों में हाथ से लिख कर केंद्र सरकार की एनआरसी और सीएए के खिलाफ नारे लिखे गए थे वही राज्य सरकार के राम वन गमन पथ योजना के खिलाफ भी नारे लिखकर इसे संघ के द्वारा आदिवासियों के हिन्दुकरण के षड्यंत्र का आरोप लगाया गया ।

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युकेश चंद्राकर

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