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जेल में बंद साथियों की रिहाई का वादा याद दिलाने आ रहे आदिवासियों की हुई श्याम गिरी में पिटाई, कांग्रेस ने वादा तो निभाया नहीं उल्टे रैली में आए लोगों को ही नक्सली बताकर भिजवा दिया जेल

आदिवासियों पर अत्याचार अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा अगर ऐसे ही निर्ममता जारी रही तो बस्तर अलग राज्य बनाने का आंदोलन भी हो सकता है शुरू : अरविंद नेताम

बाबा साहब अंबेडकर का फोटो और संविधान के अधिकार की मांग करने आ रहे आदिवासियों पर यह हमला सरकारी आतंक : सोनी सोरी

दंतेवाड़ा ( भूमकाल समाचार ) जिले के श्याम गिरी पहाड़ी के पास दंतेवाड़ा पुलिस ने डीआरजी जवानों और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों के साथ मिलकर संविधान के अधिकारों के तहत अपने अधिकारों की मांग व जेल में फर्जी मामलों में बंद अपने हजारों साथियों की रिहाई की मांग को लेकर दंतेवाड़ा की और प्रदर्शन करने आवाज आ रहे आदिवासियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा और उनका दैनिक उपयोग का समान खाना बनाने का बर्तन,छत्ता, चांवल-दाल छीन कर सड़कों में फेंक दिया ।

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ज्ञात हो कि पिछले सप्ताह भर से सुकमा दंतेवाड़ा और बीजापुर जिला के आदिवासियों ने घोषणा कर रखा था कि वह छत्तीसगढ़ सरकार को चुनाव से पहले किए गए उनके वादा को याद दिलाने के लिए दंतेवाड़ा में एक बड़ा प्रदर्शन करने आ रहे हैं । इस बात को कई दैनिक और अन्य अखबारों ने प्रकाशित भी किया था । आदिवासियों की मांग है कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले वादा किया था कि जेल में बंद फर्जी मामलों में बंद हजारों आदिवासियों को सरकार बनते ही रिहा करेंगे मगर सरकार बनने के 2 साल बाद भी अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई । इसके अलावा अडानी, स्पंज आयरन आदि अनेक कारपोरेट को आदिवासियों के जल जंगल जमीन सरकार पिछली भाजपा सरकार की तरह ही सौंपते जा रही है । आदिवासी इस बात से भी नाराज हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार जनता को सुरक्षा देने के नाम पर कारपोरेट के लिए लगातार पैरामिलिट्री फोर्स की संख्या बढ़ाते जा रही है और आदिवासियों पर दमन बढ़ाते जा रही है । फर्जी मामलों में बंद आदिवासियों को छोड़ने के बजाय सरकार बनने के बाद कांग्रेस ने 500 से ज्यादा आदिवासियों के खिलाफ फर्जी मामले बनाकर जेल में ठूंस दिया है और सैकड़ों की फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी है ऐसा आरोप आदिवासियों ने लगाया है ।

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पुलिस जवानों द्वारा किए गए हमले और निर्ममता से की गई मारपीट के बाद आदिवासी आस-पास के जंगलों और पहाड़ों में छुप गए थे जो बाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम और आदिवासी नेत्री सोनी सोढ़ी के घटनास्थल पहुंचने के बाद धीरे-धीरे सड़क में वापस आने लगे और हजारों की संख्या में फिर से जमा हो गए । उन्होंने पुलिस जवानों द्वारा मारपीट किए जाने के बाद अपने घायल साथियों को पत्रकारों के सामने प्रस्तुत किया अपने चोट दिखाएं । इन आदिवासियों में कई महिलाएं ऐसी भी थी जो अपने महीने भर के बच्चों को भी आप लेकर आई थी, साथ ही रैली में सैकड़ों बच्चे और बुजुर्ग भी थे ।

इन्होंने ने बताया कि दंतेवाड़ा पुलिस ने रात को ही उनके नौ साथियों को उठा लिया था जिन्हें नक्सली बताकर अंदर कर दिया गया है और दिन में भी 11 से ज्यादा आदिवासियों को जिसमें बच्चे भी थे, को उठाकर ले गए ।

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आदिवासियों की मांग थी कि हम तो कांग्रेस के वादा के अनुसार अपने साथियों जेल में बंद अपने साथियों को छुड़ाने के लिए यहां रैली निकालने आए थे मगर सरकार ने उल्टे हमारे रैली में शामिल लोगों को ही जेल में डाल दिया, जब तक उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा तब तक हम यहां से नहीं जाएंगे चाहे हमें भी जेल भेज दिया जाए इस मुद्दे पर अरविंद नेताम और सोनी सोढ़ी के दमदारी से खड़े रहने के बाद प्रशासन उलझन में फंस गई और अंततः दिन भर की जद्दोजहद के बाद आदिवासियों के उन साथियों को छोड़ दिया गया, जिन को दिन में पुलिस जबरदस्ती उठाकर ले गई थी जबकि रात में उठाए गए 9 लोगों को बिना किसी के सबूत के भीमा मंडावी हत्याकांड से जोड़ कर जेल भेज दिया गया । पता तो चला है कि पुलिस ने यही काम अलग-अलग दिशा से 50 से 100 किमी दूर से आ रहे आदिवासियों के साथ पोटाली, अरनपुर, मोडपाल, आदि स्थानों में भी किया । इन स्थानों में भी 1000 से लेकर 5000 आदिवासियों को घंटों रोका गया और उनके साथ अभद्रता की गई है ।

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