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अख़बार में कौन खाना देता है भाई..?

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कवर्धा जिले के सहसपुर लोहारा के सरस्वति शिशु मंदिर क्वारेन्टीन सेंटर में मजदूरों को अखबार में चावल, दाल और सब्जी परोसी गई। चावल और सब्जी तो अखबार में ठहर गई, मगर दाल बदचलन निकली। बह गई।

अख़बारों में पिछले कुछ दिनों से क्वारेन्टीन सेंटर्स की खबरें पढ़ रहा हूं कि मजदूर दारू-मुर्गे की मांग कर रहे हैं। हंगामा कर रहे हैं। उन खबरों में कितनी सच्चाई है, यह तो मुझे नहीं मालूम, लेकिन इस तस्वीर को देखने के बाद लगा कि जो मजदूर अपने लिए एक डिस्पोजल की थाली नहीं मांग पा रहा है, वह भला दारू-मुर्गा क्या मांगेगा।

इतना ही नहीं, जो प्रशासन उसे चावल, दाल, सब्जी खाने के लिए एक डिस्पोजल थाली या पत्तल उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, उस प्रशासन से वह दारू और मुर्गा मांग ले रहा है तो मैं उन मजदूरों की हिम्मत की भी दाद देता हूं।

दाद तो मैं अधिकारियों और सरकार को भी देता हूं जो दान में मिले 65 करोड़ रुपये को तरह-तरह के जतन कर बचा रहे हैं। पत्तल न खरीदकर, अखबार में खाना खिलाकर अधिकारियों और सरकार ने करोड़ों रुपये बचाये हैं। इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। उनकी पीठ थपथपाई जानी चाहिए।

ज्ञात हो कि इसी तरह की अव्यवस्था से छत्तीसगढ़ के क्वारेन्टीन सेंटर में अब तक करीब एक दर्जन लोग विभिन्न कारणों से मर चुके हैं। उनमें से एक वजह उनके साथ अमानवीय बर्ताव भी हो सकता है।।

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प्रफुल्ल ठाकुर

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