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शासक वर्ग की आलोचना करने और उनसे सवाल की फितरत है मेरी। मगर, आज एक राजनेता की तारीफ लिख रहा।

एक राज नेता का जन सेवक हो जाना।

मेरे साथ बीजापुर के क्षेत्रीय विधायक विक्रम शाह मंडावी हैं। विक्रम जी के भैरमगढ़ स्थित आवास पर बिराभट्टी गांव के कुछ ग्रामीण पानी जैसी बुनियादी ज़रूरत की मांग को लेकर मिलने पहुंचते हैं। विधायक विक्रम भी हैरान होते हैं कि आज़ादी के इतने सालों बाद भी इंद्रावती नदी के टापू पर बसे इस गांव के बाशिंदों को शिक्षा, स्वास्थ्य तो छोड़िएगा साफ पानी तक मय्यसर नहीं। विक्रम फैसला करते हैं कि, वे खुद इस गांव का दौरा कर हकीकत और ग्रामीणों की समस्याओं से रूबरू होंगे। और फिर इस गांव के विकास के लिए एक रोडमैप तैय्यार करेंगे। फिर क्या प्रशासनिक अमले के साथ विधायक खुद इस गांव तक न केवल पहुंचे बल्कि पिछड़ेपन का दंश झेल रहे इस गांव के आदिवासियों को 6 हैण्डपंप की सौगात मौके पर ही दे दी। साथ ही इस गांव के ग्रामीणों तक जल्द ही शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश प्रशासनिक अमले को दे डाला।

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विधायक विक्रम के इस दौरे में रिपोर्टिंग के लिए मैं भी उनके साथ था। ऐसे इलाकों की कई रिपोर्टिंग मैंने पिछले 8 सालों में कइयों दफे कर चुकीं हैं। तो, मेरे लिए ये सफर बिल्कुल सामान्य था। मगर एक विधायक जिसे राज्यमंत्री का दर्जा मिला हो। ऐसे सख्श का इस गांव तक मई के चिलचिलाती धूप में 5 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर पहुंचना अपने आप मे चुनौतीपूर्ण ज़रूर था। मगर तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए आदिवासी ग्रामीणों के इस दर्द को महसूस कर उनकी तकलीफों से उन्हें राहत दिलाने विधायक का इस गांव तक पहुंचना अपने आप में क्षेत्रवासियों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को परिलक्षित करता है।
बिराभट्टी गांव की इन दुश्वारियों पर कई सवाल हैं।
मसलन….
कई सरकारें, विधायक, कलेक्टर आये और चले भी गए। मगर किसी ने भी इस गांव की प्यास बुझाने के लिए एक हैंडपंप तक उपलब्ध करवा पाने की जहमत क्यों नहीं उठा पाया?
विधायक विक्रम चाहते तो प्रशासनिक अमले को बिराभट्टी गांव भेजकर रिपोर्ट मंगवा लेते और समस्या के निराकरण घर बैठे कर सकते थे। मगर उन ग्रामीणों के दुख, दर्द, और तकलीफ को महसूस करने और आदिवासी भाइयों की उस पीड़ा को जीने विक्रम खुद उस गांव पहुंचे। क्या वजह थी? अभी तो चुनाव भी नहीं हैं।
#अभीतोचुनावभीनहीं_हैं। मेरे इस एक वाक्य पर गौर फरमाया जाए तो जवाब हमारे सामने होगा।
मेरी नज़रों में विक्रम राजनेता कम और जनसेवक ज्यादा हैं। इस वजह से मुझे गर्व है कि विक्रम मेरे अच्छे दोस्तों में से एक हैं।
विक्रम भले ही मेरे दोस्त ज़रूर हैं। मगर, आने वाले दिनों में जब भी वो सरकार की जनविरोधी नीतियों का समर्थन करते हैं। या, निजिस्वार्थ को प्राथमिकता देते हुए जनहित को दरकिनार करते हैं तो, यहीं इसी मंच पे उन्हें पर्दाफाश भी ज़रूर करूँगा😊।

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मुकेश चन्द्राकर

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