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बैलाडीला के नन्दीराज पहाड़ बचाने दूसरे दिन भी डटे रहे हजारों आदिवासी , परम्परागत नृत्य में आंदोलन व संघर्ष के बोल में थिरकते हुए

भूपेश ने ट्वीट कर आदिवासियों के हक में की बात

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी धरना में हुए शामिल

मंगल कुंजाम की रिपोर्ट

किरन्दुल । दूसरे दिन भी डटे क्षेत्र के ग्रामीण, अपनी देवी देवताओं की पहाड़ियों पर हो रहे खनन रोकेने । बस्तर के आदिवासियो की वर्षों से शांति से चले आ रहे जीवन अब करवट बदलने की ओर है।

समूचे बस्तर को माओवाद और बड़े बड़े कार्पोरेट घरानों ने मानो एक साथ मिलकर तबाह करने का संकल्प ले लिया है ।

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नंदाराज की पर्वत श्रृंखलाओं पर काल मंडराने लगें है।
13 नम्बर की पहाड़ी, जी हां वही पट्टोड़ मेटा जो आदिवासियों के देव नंदाराज की पत्नी का स्थान है, आज पूरे भारत मे सुर्खियों पर है। 13 नम्बर की पहाड़ियों को बचाने आज हजारों आदिवासियो ने NMDC किरन्दुल के प्रशासनिक भवन के चेकपोस्ट को पिछले एक दिन से घेरा हुआ है, और इस दौरान आदिवासी अपनी पारम्परिक व्यवहार (रेला, पाटा गीत/नृत्य) से दूनिया को जैसे संदेश दे रहे है । वे गीत के माध्यम से लाइन लाइन जंगल दीदी, लाइन लाइन जंगल गाना गा रहे है, —कह रहे है —


जंगल घने जंगल क्रम से लदे जंगल, अपना जंगल रहेगा और अन्तकाल तक रहेगा। हम जंगल छोड़कर नही जाएंगे । सून मोदी हम भूमी छोड़ नही जाएगें ।।।।
सूनले अदानी हम नही जाएगें, हमारी आने वाली पीढ़ी क्या करेगी जब कुछ नही रहेगा तो । हम भूखे पेट रहेंगे ……
जनता है तो पैसा है, कितना जनता को परेशान करोगे —-लाईन लाईन जंगल है लाईन लाईन जंगल ।।
अंत मे —— सुनले मोदी, सुनले अदानी अपना अपना जंगल रहेगा, भूमी रहेगा ।।।।

गांव छोड़व नही ।।
जंगल छोड़व नही ।।
माय माटी छोड़व नही, लड़ाई छोड़व नही ।।

इधर आदिवासियों के पहाड़ और जंगल बचाने के आंदोलन में आज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी शामिल हुए । उन्होंने कहा कि जैसे राम मंदिर की आस्था है ,ऐसी ही इन बैलाडिला की पर्वतों पर आदिवासियों के देवी देवता विराजमान हैं और हम अंतिम समय तक इस आन्दोलन मे साथ रहेंगे । जोगी जी ने मंत्री कवासी लखमा से आवाहन किया कि वो अगर अब भी आदिवासियों की लड़ाई लड़ने की हिम्मत रखते हैं तो अपनी सरकार से इस आबंटन को रद्द करवाएं या इस्तीफा दे कर इस संघर्ष में हमारा साथ दे । उन्होंने कहा ये केंद्र और राज्य की साजिश के तहत योजना बद्ध तरीके से चोरी से खदान अडानी को दे दिया गया यदि राज्य सरकार सच में yआदिवासियों का हित चाहती है तो केंद्र के साथ साझेदारी खत्म करदे आबंटन स्वतः रद्द हो जाएगा

जबकि प्रदेश सरकार के उद्योग व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने पहले ही एलान कर दिया है कि अडानी को बस्तर में घुसने नही दिया जाएगा । बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने भी आंदोलन का समर्थन किया और धरना स्थल भी पहुंचे ।

साथ ही आज प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ट्वीट ने भी इस मुद्दे पर सरकार की नीयत स्प्ष्ट कर दी है । भूपेश बघेल ने कहा है कि उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि आदिवासियों को उनकी जमीन वापस दे देनी चाहिए । साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जंगल आदिवासी ही बचा सकते हैं ।

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