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बस्तर की माटी में समाए हुए हैं बापू

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गांधी उद्यान गोल बाजार के झंडा चौरा में पुष्पांजलि अर्पित करते पद्मश्री धर्मपाल सैनी व माता रुख्मिणी सेवा संस्थान डिमरापाल आश्रम के सदस्य

हेमंत कश्यप

जगदलपुर । वर्ष 1948 में बस्तर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बिलखनारायण अग्रवाल महात्मा गांधी का भस्म कलश दिल्ली से जगदलपुर लाए थे। यह कलश लोगों के दर्शनार्थ गेयर बाजार (गोल बाजार) के मध्य रखा गया था। बाद में यह कलश उस स्थान पर ही जमीन में दबा दिया गया और उस स्थान पर झंडा चौरा बना दिया गया।

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तब से लेकर अब तक यहां गांधी जयंती दो अक्टूबर और शहीद दिवस तीस जनवरी को गांधीवादी पुष्पांजलि अर्पित करते आ रहे हैं। पद्मश्री गांधीवादी धर्मपाल सैनी बताते हैं कि बापू की भस्म कलश भारत में बस दो जगह दबे हैं एक जगदलपुर के गोलबाजार में और म.प्र.के धार जिला के धर्मपुर में।

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हम आज बापू की 150वीं जयंती मना रहे हैं परन्तु अपने ही बस्तर की माटी में समाए बापू के संबंध में अनभिज्ञ रहे। साबरमती के संत एक बार और जागो !! बस्तर में एक और अहिंसा आन्दोलन की आवश्यकता है।

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हेमंत कश्यप

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