पर जमानत कौन कराएगा ? – आज की कविता

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सोनू रुद्र मंडावी ने आडम्बर और मनुवाद से लड़ते हुए अपनी जान दे दी । बहुत कम उम्र में उसने अपनी पहचान व्यवस्था के विपरीत धारा में चलते हुए बनाई । उनकी याद में श्रद्धांजलि सभा आज शनिवार को शाम 6:00 बजे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर प्रतिमा स्थल जीडीसी कॉलेज बिलासपुर में रखी गई है। इस नौजवान क्रांतिकारी युवा कवि के कुछ चंद पंक्ति –

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लिख तो मैं भी सकता हुं साहब
पर जमानत कराएगा कौन ?

असमानता, शोषण की राह लिखुं
या दमनकारियों की वाह लिखुं,
कल्लुरी की जीत लिखुं
या खामोश आदिवासियों को मृत लिखुं।
नक्सलियों के कुकर्म लिखुं
या महिलाओं का दुष्कर्म लिखुं

लिख तो मैं भी दुं साहब
पर लगी आग बुझाएगा कौन ?
मेरा तो आदिवासी होना ही काफी है मेरी हत्या के लिए
नक्सली व मुखबीर होना तो बस बहाना है।
मेरी माटी पर है नजर तुम्हारी
विकास व समसरता तो बस फसाना है।।
छिन लेना चाहते हैं सारी सम्पदाएं मुझसे ,
जो प्रकृति ने मुझे दिया प्यार से ,
मैनें सरंक्षण किया सबका
पर अब लूटना चाहते हैं व्यापार से।।

—-सोनू मरावी “रुद्र”

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