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पता नहीं, अब कुष्ठ पीड़ितो की देखभाल करने कौन आएगा सामने, बापट जी अब इस दुनिया में नहीं रहे

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गिरीश पंकज

कुष्ठ रोगियो की सेवा में जीवन होम करने वाले पद्मश्री दामोदर गणेश बापट नहीं रहे। यह समाचार व्यक्तिगत तौर पर पीड़ा से भर गया । मैं बापट जी को पिछले 45 साल से जानता था । बिलासपुर में रहकर जब युगधर्म अखबार के रिपोर्टर के रूप में मैंने अपना काम शुरू किया, तभी एक दिन मुझे पता चला कि चांपा कसबे के पास एक गांव है सोंठी जहां कुष्ठ आश्रम चल रहा है और इसे चलाने वाले हैं बापट जी।

     रिपोर्टिंग करने के हिसाब से सोंठी गया। बापटजी से मुलाकात हुई । बहुत सारी जानकारियां मिली।  उसे संचित करके एक रिपोर्ट  भी प्रकाशित की। इसके बाद से बापट जी से समय-समय पर भेंट होती रही । बाद में मैं रायपुर आ गया। कभी-कभार किसी काम के सिलसिले में बापट जी रायपुर आते तो उनसे मुलाकात जरूर होती। 

     बापट जी ने महाराष्ट्र छोड़ कर सोंठी के कुष्ठ आश्रम को जीवन क्यो समर्पित कर दिया, पूछने पर उन्होंने  बताया था कि उनके परिचित सदाशिव रात्रे ने 1962 में इस आश्रम की स्थापना की थी। 1972 में जब उनका निधन हो गया, तब मुझे लगा इस काम को मुझे आगे बढ़ाना ही चाहिए । बस, आ गया सोंठी।

       बापट जी को पिछले साल ही पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया था। बापट जी अब इस दुनिया में नहीं है । 87 साल की आयु तक वे सेवाकार्य में रत रहे। पता नहीं, अब कुष्ठ पीड़ितो की देखभाल करने कौन आएगा सामने।

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( श्री गिरीश पंकज जी प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार व जाने-माने साहित्यकार हैं )

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