कुलपति जी आपने बिलासपुर का नाम मिट्टी में मिला दिया ।

बिलासपुर के केन्द्रिय विश्व विद्यालय गुरू घासीदास विश्वविद्यालय का नाम यहां के कुलपति ने खुद ही मिट्टी में मिला दिया । यहां आयोजित हिन्दी सम्मेलन में देश प्रदेश के साहित्यकारों को बुलाया गया था । मौका था उन्हें सुनने का लेकिन कुलपति जी खुद ही कहानी सुनाने लगे यहां तक भी ठीक था लेकिन उसके बाद उन्होंने यहां आमंत्रित साहित्यकार मनोज रूपड़ा से जो व्यवहार भरी सभा में किया उसने पुरे साहित्य समाज के साथ ही बिलासपुर की मेहमनवाजी को भी गर्त में डाल दिया ।
ये आयोजन कुलपति के ना तो घर का था और ना ही उनका पारिवारिक और ना ही केन्द्रिय विश्व विद्यालय ही उनका नीजी संस्थान है । ऐसे में किसी आमंत्रित अतिथि के साथ ऐसा व्यवहार अभद्रता की सारी हदें पार करने वाला है ।
इस घटना को तीन दिन से उपर होने को आ रहे हैं लेकिन इतनी छिछालेदर के बाद भी कुलपति की तरफ से इस पर कोई सफाई नहीं आई है ये उनकी ढिढता को दिखाने के लिए काफी है ।
इस आयोजन में कुलपति का ये कहना कि साहित्यकार को कुलपति से बात करने का तरीका नहीं पता तो ये तरीका हम भी नहीं जानते । यदि कुलपतिजी के पास ऐसी कोई किताब हो जिसमें ये उल्लेख हो तो जरूर देवें ताकि आगे ध्यान रखा जा सके । वैसे कुलपति के पास ये भी जानकारी नहीं होगी कि किसी आमंत्रित अतिथि के साथ कैसे बात की जाती है ।
इस पूरे मामले से आहत कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने भी एक पत्र कुलपति को हटाने के लिए महामहिम राष्ट्रपति के नाम लिखा है । इसके साथ ही सारा लेखक समाज ,पत्रकार और प्रबुद्व जन कुलपति के इस व्यवहार को लेकर अचंभित और दुखी है ।
इतने अहम पद पर किसी की नियुक्ति के पहले उसका अगला पिछला रिकार्ड भी देख लेना चाहिए । हम कुलपति के इस व्यवहार की घोर निंदा करते हैं और बिलासपुर की महान संस्कृति पर धब्बा लगाने वाले कुलपति से इस पूरे मामले में सफाई भी चाहते हैं । सरकार क्या निर्णय लेती है ये देखना होगा । बहरहाल इस समय तो बिलासपुर की शान में गुस्ताखी हो ही चुकी है । बिलासपुर यंु भी न्यायधानी है ऐसे में किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए ।

संजीव शुक्ला जी के वॉल से
