छत्तीसगढ़

सुशील पाठक,से जुड़ी यादें,औऱ साय सरकार से आस


‘दैनिकभास्कर’ के वरिष्ठ पत्रकार सुशील पाठक से बिछड़े 15 साल हो रहे है।19 दिसम्बर 2010 उनकी देर रात सरकंडा में करीब से तीन गोली मार कर हत्या करने वाले अब तक पकड़े नहीं जा सके है। कारण सही विवेचना नहीं हुई है।


‘दैनिक भास्कर’ बिलासपुर के शुरुवाती दौर अच्छे पत्रकार यहां आना नहीं चाहते थे।किसी तरह राजेश अग्रवाल देशबन्धु से आए और एक रात सिटी चीफ का काम कर वापस चले गए। काफी काम का भार मेरे पर था, तभी रात दो बजे प्रेस लैंड- लाइन पर घर मे जानकारी दी गयी कि बिलासपुर पहुंचने के गतौरा स्टेशन के समीप गीतांजलि एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गयी है।
दुर्घटना बड़ी थी और नए अख़बार में यह खबर सुबह जरूरी थी। इसलिए अख़बार छपाई रोक दी गयी और खबर के लिए कैमरा लेकर सीधे बिलासपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा। संयोग से रिलीफ ट्रेन दुर्घटना स्थल के लिए रवाना होने वाली थी। उसमें सवार हो कर 15 मिनट में मौके पर पहुंच गया।
वह कड़कड़ाती हुई ठंड और अंधेरी रात,वीरान स्थल,कुछ फोटो और जानकारी लेकर कर उसी रिलीफ ट्रेन से वापस आया। उसी कोच में सुशील पाठक से परिचय हुआ। वह ‘दैनिक लोकस्वर’ में काम करता था।
तब तक मोबाइल फोन का युग नहीं आया था। सुशील पाठक ने कहा- वह स्टेशन से फोन कर ले फिर साथ सिटी चलेंगे। उसने फोन किया और बहुत जवाब से मायूस हो गया।पूछा तो पता चला कि जिसने फोन रिसीव किया वह खबरों की अहमियत नहीं समझता था। उसने जवाब दिया- अखबार छप रहा है,काम रुकेगा नहीं।
मैनें सुशील से कहा-मेरे पास देर रात काम करने वाला रिपोर्टर नहीं और जहां काम कर रहे वहां तुम्हारी खबर प्रकाशित होती नहीं।
बस फिर क्या था,सुशील ने पूछा कि कब आऊं?
मैने कहा-सुबह 11 बजे दैनिक भास्कर पहुंच जाना।
वह वक्त पर वह पहुंचा और सिटी रिपोर्टर्स की टीम में शामिल हो गया।
सुशील करीब दस साल दैनिक भास्कर में काम किया और इस बीच ला की पढ़ाई पूरा की और बिलासपुर प्रेस क्लब के सचिव भी बन गया। अक्सर रात का भोजन हम दोनों साथ करते और फिर वाक कर अपने-अपने काम में लग जाते। खेलों का वह बहुत शौक़ीन था।
मेरा रिटायरमेंट करीब था और मानहानि का कुछ मामले पेंडिग थे। सुशील ने सलाह दी’ अभी सम्पादक हैं। बाद कोई पूछेगा नहीं, ये मामले अभी निपटा लो। मैंने वैसा ही किया। फिर भी दो मामले बचे रह गए।
आज सुशील इस दुनिया में नहीं है, उसकी हत्या करने औऱ कराने वाले कानून की गिरफ्त से परे हैं। पर दिल यह कहता है- एक दिन सुशील पाठक की हत्या के कारण का खुलासा होगा और अपराधी जेल दाखिल होंगे।
सीएम से अपेक्षा-
सरकारें बदली और अब विष्णु देव यदि वह इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने योग्य पुलिस अफसर को फिर से इस मामले की तहकीकात करते हैं तो सम्भव है खुलासा हो जाए.

प्राण चड्ढा के फेसबुक वॉल से