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विज्ञान के प्रयोगों की सफलता और असफलता हमें अनुभव देते हैं दुख नहीं, असली दुख तब होता है जब वैज्ञानिकता का गला घोंटा जाता है

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मैं चन्द्रयान-2 के लैंडर विक्रम रोवर के सम्पर्क टूटने से बिल्कुल दुखी नहीं हूं. विज्ञान ने प्रयोगों की श्रृंखला में कामयाबी और असफलता के कई पड़ाव तय किये हैं.
विज्ञान के प्रयोगों की सफलता और असफलता हमें अनुभव देते हैं दुख नहीं.
असली दुख तब होता है जब वैज्ञानिकता का गला घोंटा जाता है. साइन्टिफिक टेम्पर को देश के “टॉप लेवल” के साइन्टिस्ट छिन्न-भिन्न कर रहे होते हैं, और अन्धविश्वास की शरण में होते हैं. विज्ञान जानना और वैज्ञानिकता को समझना दो बिल्कुल अलग छोर तो नहीं हैं लेकिन व्यापक जनसमूह की स्वीकार्यता और असफलता के डर ने वैज्ञानिकों को अवैज्ञानिक बना दिया है. देश के सोशल साइन्टिस्टों के पास देश के रॉकेट साइन्टिस्टों से ज्यादा वैज्ञानिक मन है.
क्रिकेट मैच के दौरान सचिन के ना आउट होने के लिए यज्ञ हवन करने वाले लोगों ने चन्द्रयान-2 की सफल लैंडिंग के लिए देश भर में यज्ञ-हवन शुरू कर दिए.
एक सच्चा वैज्ञानिक वही है जो इस तरह के कर्मकांडो से देश के लोगों को दूर रहने की सलाह दे.
लेकिन हमारे वैज्ञानिक तो खुद यही करते हैं. खुद मंदिर में जाते हैं रॉकेट का मॉडल मंदिर में चढ़ाते हैं और सफलता की कामना करते हैं. जब वो ये कर रहे होते हैं तो देश भर में वैज्ञानिकता की भावना विकसित कर रहे लाखों साइंस एक्टिविस्टों के किए धरे पर एक झटके में पानी फेर देते हैं.
इसरो चीफ ने चन्द्रयान-2 की सफलता के लिए घूम-घूम कर पूजा-अर्चना की. मैं इसका मजाक नहीं उड़ा रहा. वो शायद इस मनोवैज्ञानिक डर के साये में रहे हों कि गड़बड़ होने पर कहीं इसका ठीकरा पूजा-पाठ ना करने पर ना फोड़ दिया जाय.
लेकिन अब इस परम्परा को बन्द कर देना चाहिए, हर रॉकेट लांचिंग से पहले नारियल फोड़ना, घूम-घूम कर रॉकेट का मॉडल मंदिरों में चढ़ाना. ये वैज्ञानिकता की हत्या है. ये एक दृश्य देश लाखों करोड़ों लोगों के मस्तिष्क को एक पल में पंगु बना देता है.
अभी सही वक्त आ गया है, भारत को अपनी वैज्ञानिक यात्रा के रास्ते से अन्धविश्वास को हटा देना चाहिए. और अगर कोई आपत्ति करे तो उसके सामने चन्द्रयान-2 का उदाहरण पेश किया जाय.

Deepankar patel

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विक्रम लैंडर तो फेल हो गया लेकिन बैताल लैंडर उर्फ मीडिया ने बैताल को लेंड करा ही दिया है……….

विक्रम लैंडर से हमारा सम्पर्क टूट गया और हम उसकी सॉफ्ट लैंडिंग नही करवा पाए ……..इसरो के वैज्ञानिकों ने जी जान से कोशिश की वो बधाई के पात्र हैं हम जानते हैं कोशिश करने वालो की हार नही होता हम अगली बार दुगुने उत्साह से फिर कोशिश करेंगे…. यही विज्ञान है हम हर घटना दुर्घटना से कुछ सीखते हैं, फिर आगे बढ़ते हैं और बढ़ेंगे, इसरो के लिए हर भारतवासी के दिल मे एक सम्मान की भावना है…….

बाकी जिस प्रकार से इस चन्द्रयान मिशन को लेकर मीडिया मूर्खतापूर्ण तरीके की हाइप क्रिएट करने की कोशिश करता रहा उस पर तुरन्त ध्यान देने की जरूरत है कल सुबह गलती से रिमोट का बटन दब गया….. ABP न्यूज़ कम से कम 5 मिनट तक यही बताता रहा कि इस बड़े मंदिर में चन्द्रयान की सफलता के लिए यह विशेष पूजा अर्चना की जा रही है उस बड़े मंदिर होम हवन किये जा रहे हैं ऐसे अलग अलग देश के 7 से 8 बड़े मंदिर उसने दिखाए

क्या जिस प्रकार मीडिया इसरो से चंद्रयान से सम्पर्क टूट जाने की वजह पूछ रहा है क्या उसी प्रकार से वह प्रत्येक मंदिर के पंडे पुजारी से जाकर यह पूछेगा कि पूजा पाठ में कौन सी कमी रह गयी?

मीडिया अब भी बाज नही आ रहा है अब भी वो मोदी की ब्रांडिंग करने में लगा हुआ है …….विक्रम लैंडर तो फेल हो गया लेकिन बैताल लैंडर उर्फ मीडिया ने बैताल को लेंड करा ही दिया है…….

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Girish Malviya

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