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रात दस बजे दी अतिक्रमण हटाने का नोटिस और दिन में दो बजे ढहा दिया गया पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष का मकान

एक तरफ प्रदेश सरकार अतिक्रमित और खाली पड़े सरकारी जमीन को बेच रही है वहीं दूसरी ओर बदले में तोड़-फोड़ भी

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छोटे कापसी (भूमकाल समाचार) । नगर पंचायत पखांजूर के पूर्व नगर अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता असीम राय के घर पर प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुलडोजर चला दिया। प्रशासन द्वारा एक दिन पूर्व ही पूर्व अध्यक्ष को इस अतिक्रमण के संबध में नोटिस दिया गया था और एक दिन में ही सुनवाई पूरी कर रात दस बजे उन्हें अतिक्रमण हटाने का नोटिस दे दिया गया और आज 2 बजे 24 घंटे पूरे होते ही प्रशासन ने अतिक्रमण भी हटा दिया। प्रशासन की इस कार्यवाही को पूर्व अध्यक्ष ने राजनैतिक दुर्भावना की कार्यवाही बताते हुए कहा की शासकीय रिक्त भूमी के पटटे देने का विरोध किया था जिसके चलते उन्हें प्रशासन द्वारा टारगेट किया जा रहा है।

एक और प्रशासन अतिक्रमित भूमि का पटटा दे रहा है वही दुसरी ओर अतिक्रमण अभियान भी चला रहा है। आज प्रशासन ने पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष व भाजपा के नेता असीम राय के एक घर में अतिक्रमण अभियान चला पूरा घर ही तोड़ दिया। पूर्व अध्यक्ष ने इस घर को कुछ वर्ष पूर्व खरीदा था पर इस जमीन का पटटा नहीं था। वर्ष 2011 में पखांजूर के तात्कालिक तहसीलदार ने नियम कायदों को दर किनार कर इस जमीन का पटटा दे दिया था पर वर्ष 2014 में पखांजूर तहसीलदार द्वारा इन फर्जी पटटों की शिकायत के बाद कांकेर कलेक्टर ने वर्ष 2011 में जारी समस्त पटटे निरस्त कर दिए थे और इन भूमि का अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसी आदेश के परिपालन में आज प्रशासन ने इस कार्यवाही को अंजाम दिया है।

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इस आदेश के परिपालन में पखांजूर तहसीलदार ने दिनांक 14 जुलाई को असीम राय को नोटिस जारी किया और दिनांक 15 जुलाई को सुनवाई का मौका दिया और एक दिन में ही पूरी सुनवाई कर अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी कर दिया। रात 10 बजे तहसील का एक कर्मचारी असीम राय को नोटिस देने उनके ग्राम पी.व्ही. 28 पहुंच गया। रात को असीम राय ने नोटिस लेने से मना कर दिया । जिसके बाद आज सुबह

उसके दरवाजे में नोटीस चस्पा कर दिया।

बाद में दोपहर 2 बजे के बाद प्रशासन के अधिकारी दल बल के साथ पहुंचे और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही कर दी। प्रशासन ने इस अतिक्रमण हटाने के लिए रात से ही तैयारी शुरू कर दी थी और दिनांक 15 जुलाई की शाम ही जेसीवी और पोकलैंड को पकड़ कर रेस्ट हाउस में खड़ा करा दिया गया था और उनके ड्रायवरों को भी रेस्ट हाउस में रख लिया था ताकि 2 बजे के बाद प्रशासन कार्यवाही कर सके। प्रशासन द्वारा इस तेजी से कार्यवाही की क्षेत्र में जमकर चर्चा का विषय रहा ।

प्रशासन की इस कार्यवाही के बाद फर्जी पटटे का मामला पुनः चर्चा में आ गया है। वर्ष 2011 में तात्कालिक तहसलीदार पखांजूर ने रिटायमेंट के ठीक पहले नगरीय क्षेत्र में 50 से अधिक और पूरे तहसील क्षेत्र में तीन सौ से अधिक फर्जी पटटा जारी कर दिया था। वर्ष 2014 में पखांजूर तहसीलदार की ही शिकायत पर कांकेर कलेक्टर ने ही इन सभी पटटो को खारीज कर दिया और सभी भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। पर इस मामले में उक्त तहसीलदार पर कोई कार्यवाही नहीं की गई जिसने रिटायमेंट के पहले पहले इतनी संख्या में फर्जी पटटे बांट दिऐ। वर्तमान में पखांजूर में ही 50 से अधिक वही फर्जी पटटेधारी है जिन पर कार्यवाही लंबीत है। अब देखना है की पखंाजूर में उन पर प्रशासन इस तेजी के कब कार्यवाही करता है।

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प्रशासन की इस कार्यवाही ने एक तीर से दो शिकार कर दिऐ पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष असीम राय का घर तोड़ राजनैतिक विरोधियों को भी संदेश दे दिया गया। साथ ही कुछ दिन पूर्व भू स्वामी योजना के तहत पटटा देने के विरोध में नगर बंद था उनकों भी संदेश दे दिया गया है। इस कार्यवाही के बाद प्रशासन का पटटा दे राशि बसूली का लक्ष्य आसानी से पूरा होने की संभावना बढ़ गई है।

पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष असीम राय ने इस कार्यवाही को राजनैतिक कार्यवाही बताते हुए कहा की प्रशासन के अधिकारी पूरी तहर से सत्ता के दवाव में है और उन्हीें के इशारे में इस तेजी से कार्यवाही हो रही है। उन्होनंे बताया की न उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया और न ही इस आदेश के खिलाफ अपील करने का और प्रशासन ने उनका घर तोड़ दिया। वे इस जगह का वर्तमान योजना के तहत पटटा लेना चाहते थे और उन्होनंे ंअपने जवाव में इसके लिए आवेदन भी किया पर अधिकारियों ने उनकी इस अपील को खरीज कर दिया। उन्होनंे आरोप लगाया की कुछ दिन पूर्व उन्होनंें भू स्वामी योजना के तहत निःशुल्क पटटा देने की मांग की थी और इस योजना के तहत पखांजूर में शासकीय भूमी के पटटे बांटने का विेरोध करते हुए आपत्ती की थी जिसके चलते प्रशासन के अधिकारी उन्हें टारगेट कर रहे है।

इस सबंध में पखांजूर तहसीलदार शेखर मिश्रा ने बताया की यह कार्यवाही एक दिन में नहीं हुई है यह विगत 6 वर्ष से कार्यवाही लंबित थी। उन्हें सुनवाई के दौरान पूरा अवसर दिया गया तथा अतिक्रमण हटाने के लिए 24 घंटे का समय भी दिया गया, जिसके बाद प्रशासन ने यह अतिक्रमण हटाया है। वर्तमान में इस घर में कोई निवासरत नहीं था और न ही कोई व्यवसाय चल रहा था ऐसे में भूस्वामी योजना के लिए पात्र नहीं थे ।

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राजदीप शर्मा

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