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छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती परीक्षा 2019 का षड्यंत्र

पहले अपात्र घोषित हो चुके प्रत्याशियों को बुलाया गया सत्यापन के लिए, पहले जो थे श्रवण बाधित अब दृष्टि बाधित हो चुके

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देवेश तिवारी अमोरा

शिक्षक भर्ती परीक्षा जिसका सब काम लगभग हो चुका था, उसमें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सहृदयता दिखाते हुए कोरोना के आ​र्थिक संकट के बीच भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
मगर अधिकारियों विशेष रूप से आलोक शुक्ला जी ने क्या किया।
जिन परीक्षार्थियों ने पहले सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया था, उस दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया जिसमें अपने दस्तावेजों की जांच करानी पड़ती है। उसे शून्य घोषित कर दिया।
पहले कौन नौकरी के लिए पात्र है कौन अपात्र है अपात्र होने का कारण क्या है सब छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग ने पत्र जारी किया था। इस पूरी प्रक्रिया को ही शून्य घोषित कर दिया गया।
अब नए सिरे से सत्यापन की प्रक्रिया हो रही है। शून्य घोषित करने का अभूतपूर्व कारण प्रदेश के एक अधिकारी श्री आलोक शुक्ला जी को पूर्व में हुए #सत्यापन की #जानकारी नहीं है।
दूर दूर से रायपुर पहुंचकर 8 सेट में अपने मूल दस्तावेज दिखाना एक अधिकारी की मनमानी की वजह से #शून्य घोषित कर दिया गया।
अब सत्यापन कराने के लिए नई सूची जारी की गई है। उसमें त्रुटियां देखिए। पूर्व के सत्पापन में जिसे शिक्षा विभाग कुछ कारण जैसे निवास प्रमाण पत्र नहीं होने, एमए थर्ड डिविजन पास होने, समय पर बीएड पूरा नहीं होने की वजह से अपात्र घोषित कर चुका है
उन्हें सत्यापन के लिए बुलाया गया है। यानी जो अपात्र हो चुका है जिनकी सूची सार्वजनिक है उसे फिर से पात्रता साबित करने के लिए बुलाया गया है।

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इसमें दिव्यांग श्रेणी है कई अभ्यर्थी जिन्हें पहले श्रवण बाधित बताया गया था अब वे दृष्टि बाधित हो चुके हैं।
ऐसा क्यों हो रहा है। 14580 शिक्षकों की भर्ती प्र​क्रिया को अधिकारी विवादों में डालकर मध्यप्रदेश का व्यापम बनाना चाहते हैं। जैसे मान लिजिए किसी का तय दिनांक तक निवास प्रमाण पत्र नहीं है। वह अधिकारीयों को सेट करके पूर्व तिथि में निवास प्रमाण पत्र बनवा लेता है तो वह पात्र हो जाएगा। लेकिन बाकि अभ्यर्थीयों को यह मालूम है कि वह तो इसी बेस पर अपात्र हो चुका है। तो लोग न्यायालय चले जाएंगे। मामला लंबित हो जाएगा। शिक्षा विभाग यह बता पाएगा कि, देखिए अब तो मामला कोर्ट में है हम क्या करें लंबित होगा ही।
इस तरह सरकार की किरकिरी एक अधिकारी श्री आलोक शुक्ला जी की वजह से होगी।
आलोक शुक्ला बेहद काबिल शिक्षित अधिकारी है मगर न जाने क्यों पूरी प्रक्रिया को विवादों में डालना चाहते हैं। किसी पूनित कार्य में छोटी सी गलती होने पर पूरा उद्देश्य प्रभावित होता है।
यह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का सबसे बड़ा विजन ​था कि, सरकार आते ही शिक्षकों की भर्ती की जाए, इसी मंशा से उन्होंने भर्ती निकाली अब अधिकारी षणयंत्र के तहत उनकी क्षवी को खराब करने के लिए भर्ती प्रक्रिया को विवाद में डाल रहे हैं। इस सम्बंध में पूर्व शिक्षा मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह को पत्र भी लिखा है।

श्री आलोक शुक्ला जी सत्य सुनने योग्य नहीं हैं। उन्होंने मुझे ब्लॉक कर रखा है कृपया शेयर और अन्य माध्यमों से उन तक भी बात पहुंचाई जाए

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,( देवेश तिवारी अमोरा के फेसबुक वॉल से )

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