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“कविता का आह्वान – बचाओ संविधान “ में 6 दिसंबर पर विमर्श भी और काव्यपाठ भी

देश की विविधता में एकता और संविधान को बचाने एकजुटता बढ़ाना जरुरी – डॉ बिप्लब वंदोपाध्याय

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रायपुर 6 दिसंबर 2019 , अखिलभारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन, जनवादी लेखक संघ , भारत ज्ञान विज्ञान समिति, इप्टा , प्रगतिशील लेखक संघ, जन नाट्य मंच जैसे संगठन रायपुर में आज एक मंच पर एकत्र थे. 6 दिसंबर 1992 को हमारे देश के इतिहास में एक काला दिन निरुपित करते हुए इस आयोजन में 27 वर्ष पहले किये गए खुले आम अपराध के दोषियों को अब तक सज़ा न दिए जाने पर चिंता व्यक्त की गयी.


1992 में इसी दिन अयोध्या में बाबरी मस्जिद के साथ-साथ शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के मानवीय मूल्य और संविधान के मर्म को भी ध्वस्त किया गया था. कार्यक्रम में माना गया कि इंसानियत बचाने के लिए उस दिन के वहशी मुज़रिमों को बेनकाब करते रहना ज़रूरी है. चर्चा, कविताओं और जनगीतों के माध्यम से सांस्कृतिक प्रतिरोध में बड़ी संख्या में युवा और वरिष्ठ रचनाकारों, पाठकों, संस्कृति कर्मियों ने भागीदारी की.

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डॉ विप्लब वंदोपाध्याय ने बाबा साहेब आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस के दिन इस घटना को अंजाम देने वालों के योजनाबद्ध मंसूबो को देश के लिए खतरनाक बताया. आम्बेडकर जी के योगदान के साथ-साथ महात्मा गांधी और मार्क्सवादी लेनिनवादी दर्शन को याद रखने की जरुरत रेखांकित करते हुए उन्होंने देश के संवैधानिक बुनावट और एकजुटता के लिए इन्हें जरुरी बताया. कविताओं के माध्यम से संविधान को बचाने की लड़ाई को उन्होंने सड़क की लड़ाई में बदलने का शुरूआती कदम बताया. देश के चर्चित कवि विष्णु नागर की कविता ‘मोदी’ का पाठ करके उन्होंने अपनी भागीदारी निबाही.
डॉ विक्रम सिंघल ने लोकतंत्र के बहाने अपनी ताकत बढ़ा कर दूसरो के दायित्व को बढ़ाने की प्रवृति से अंततः समाज में व्यवस्था की पहुंच से खुद को ऊपर उठा लेने, कानून के प्रति लापरवाह हो जाने की गलत समझ को सिद्धांतो से स्पष्ट किया. अयोध्या के मामले में वैज्ञानिक तर्कों की उपेक्षा, पुरातात्विक बसाहटों के सिद्धांतो को दरकिनार करने की राजनैतिक चतुराई को उन्होंने देशहितों के लिए हानिप्रद बताया. जिसमे कहीं भी सभ्यताये पानी और अनाज उत्पादन के लिए सुविधाजनक स्थानों पर ही बसे होने के अवशेष पर्त दर पर्त मिलने के तथ्यों को सामने रखा. इसलिए अवशेष मिलने को स्वाभाविक बताया.
युवा विचारक विनयशील ने राजेश जोशी की प्रसिद्ध कविता “मारे जायेंगे” का पाठ करते हुए आज के सामाजिक संकट पर राजनैतिक पतनशील संस्कृति की बात कही, जिसके कारण समाज में विषाक्त वातावरण बनाया गया है और संविधान की मर्यादा को लगातार चुनौती दिए जाने की भयावह स्थिति को स्पष्ट किया. 6 दिसंबर 92 का जिक्र यह भी याद दिलाता है कि हमारी स्मृतियाँ बनावटी होती है जिन्हें योजनाबद्ध ढंग से बनाया और बिगाड़ा जा सकता है. जैसा कि अयोध्या के नाम पर पिछले 60 वर्षों में किया गया. युवाओं को अपने पसंद के क्षेत्र में काम करने के लिए दृढ संकल्पित होना चाहिए. वरिष्ठ रंग निदेशक निसार अली ने कैफ़ी आजमी की रचनाओं का पाठ किया जिसमे सरजू के तट पर राम के आने पर आज खून के धब्बों का जिक्र किया गया है. डॉ आलोक वर्मा की कविता का भी पाठ उनके द्वारा किया गया. इप्टा के वरिष्ठ निदेशक बालकृष्ण अय्यर ने आज की विसंगतियों के सूत्र पिछले दशको के निर्णयों में बताया , उन्होंने कुमार अम्बुज की कविता का पाठ किया.

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युवा कवियों में काव्या ने अपनी कविताओं से वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक तानेबाने पर प्रश्न चिन्ह खड़ा किया, दूसरी ओर संवैधानिक मर्यादाओं की परवाह न किये जाने की स्थिति को स्पष्ट किया, उन्होंने ‘ सीता ‘ कविता के माध्यम से स्त्री के संघर्षो को भी सहजता, सरलता से अपनी कविता में स्पष्ट किया . युवा कवि सिद्धांत ने अपनी कविता में यौन प्रताड़ित युवा स्त्री के सामाजिक प्रताड़ना के अहसासों को रेखांकित किया . फिज़ा अली ने उदय प्रकाश की प्रसिद्ध कविता ‘औरतें ‘ के पाठ से आज की स्थितियों को बताया.
इंजिनियर टी मेश्राम ने उन्नाव जैसी घटनाओं को समाज के समक्ष कलंक बताते हुए संविधान को बचाने का आहवान किया. जसिता केरकेट्टा की कविता के पाठ से उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर आदिवासी क्षेत्रो के सैन्यीकरण पर सवाल उठाये. प्रलेस के संजय शाम ने आज के समय को आज़ादी के बाद के सबसे बड़े संकट के दिन निरुपित करते हुए अपनी रचनाओं में परिस्थितियों की विद्रूपताओ को उजागर किया. वरिष्ठ पत्रकार आलोक पुतुल ने इस अवसर पर कविता कृष्ण पल्लवी की ‘ तानाशाह के मन की बात ‘ कविता का पाठ किया.
रंग कर्मी तथा फिल्मकार शेखर नाग ने जीवन यदु की रचनाओं के गायन से समां बाँध दिया तथा गजानंद माधव मुक्तिबोध की कविताओं के पाठ से अपनी भावनाए व्यक्त की. कार्यक्रम का संचालन करते हुए पी सी रथ ने आज के हालातों को लोकतंत्र और संघर्षो से आज़ादी के लिए पीड़ा दायक बताते हुआ संवैधानिक मूल्यों के लिए जनता को जागरूक करने की जरूरतों पर बल दिया तथा कविता कृष्ण पल्लवी की कविता ‘तानाशाह जो करता है’ का पाठ किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी अरुण काठोटे , चिकित्सक डॉ शाह बाज़ खान , डॉ प्रियदर्शन , ऋषभ, दिलीप साहू , पूजा , विजय एवं अन्य कई युवा शामिल थे.

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