आदिवासी भी तो नगरिक है ….

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जब आप अपने घरों में टीवी का चैनल बदलते कंगना – रिया मुद्दे पर पानी पी पीकर कोस रहे थे या किसी वेब सीरीज के बारे में दोस्त से कड़क चाय के साथ फीकी चर्चा कर रहे थे । तभी आपके राज्य के दक्षिण हिस्से में आदिवासियों पर लाठी चार्ज हुआ , जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे । तस्वीरों , सूचनाओं और अन्य माध्यमों से प्राप्त जानकारी के आधार पर लगता है कि सत्ताधारी लोगों के पास उतनी ही संवेदनशीलता बची है जितनी किसी पिशाच के मन में ममता बची होती है ………….

मामला यह है कि मुद्दा यह है कि नगरनार प्लांट के निजीकरण का विरोध , फर्जी मामले में फंसे आदिवासी , बस्तर क्षेत्र में सविंधान को लागू करने के लिए सुकमा – बीजापुर जिले से हजारों आदिवासी दंतेवाड़ा मुख्यालय एक बड़ा प्रदर्शन करेंगे । जिसे स्थानीय अखबारों ने छापा भी था । इस पैदल रैली को जगह रोके गए , बेरिकेट्स लगाए और फिर भी भीड़ जब आगे बढ़ने लगी तब श्यामगिरी पहाड़ के नजदीक इन्हें दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया । बर्तनों को फेक दिया गया , यहां तक कि महिलाओं व बच्चों को भी नही बख्शा गया। भीड़ को तितर बितर होते तक प्रशासन मनमानी करती रही । इसी वजह से आदिवासी अपना सामान छोड़कर मार से बचने के लिए महिलाओं बच्चों सहित पहाड़ व जंगल की ओर भाग गए । मामले को तूल पकड़ता देख स्थानीय नेता आदिवासी के हक में सामने आए ।

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चाहे आप किसी विचारधारा के पोषक हो , आपके अपने तर्क हो सकते है । बावजूद इसके जब एक भीड़ शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रही है , अपनी बात सरकार तक पहुँचा रही है या पहुँचाना चाहती है । सत्ता से निवेदन करके जवाब मांग रही है और उसके किये वादों को याद दिला रही है । तब ऐसा क्रूर दमन इसलिए जायज है कि कोई आपका कुछ नही बिगाड़ सकता , या आपका वोट बैंक प्रभावित नही होता , या चुनाव नजदीक आने पर फिर कोई पवित्र नदी का पानी हाथ में लेकर झूठा कसम खा लोगे , या कोई अमीर पूंजीपति जवाबदेही लोगों को कठपुतली की तरह नचा रही है ।

एक तर्क यह भी है कि माओवादी के माध्यम से भोले भाले आदिवासियों को बरगलाया जा रहा है । चलो इस बात को मान भी ले तो आप उस तर्क का जवाब लाठी और जुल्म से दोगो । इस हिसाब से तो सरकार और आदिवासियों की दूरियां बढ़ेगी ही । ऐसी खबरों पर न कोई न्यूज चैनल डिबेट करता है न राष्ट्रीय न्यूज पेपर के मुख्य पृष्ठ में जगह मिल पाता है। इसलिए आपकी संवेदनशीलता वैसे हो जाती है जैसा मीडिया तय करता है । यह कभी सम्भव नही होगा कि एकाध हैशटेग इन आदिवसियों पर हुए जुल्म के लिए दिखाई दे ……..

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समय मिले तो तस्वीरें में दिखती बेबसी को किसी TRP जैसे किसी मापक मीटर यन्त्र से माप लीजिए ….

फ़ोटो क्रेडिट- भूमकाल समाचार , कमल शुक्ला

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सूरज डडसेना

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