भारत में 70 साल तक कोई प्रधानमंत्री ऐसा नहीं हुआ जो किसी विदेशी से डांट खाकर आया हो

इंदिरा गांधी तो ऐसी थीं जिन्होंने 1971 के युद्ध के समय अमेरिकी सेना का सातवां बेड़ा भेजने की धमकी पर कह दिया था, “सातवां बेड़ा हो या सत्तरवां, हिंदुस्तान किसी से नहीं डरता।” और पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए। अमेरिका देखता रह गया।
ऐसी हजारों गौरवशाली एवं शौर्यपूर्ण कहानियां हमें अच्छी नहीं लगीं। फिर हमने प्रधानमंत्री की जगह शेर चुन लिया।
शेर क्या है, बस कागजी शेर है। पिछले छह महीने में उस पगले ट्रंप ने इनको 70-80 बार बेइज्जत किया है। जाने कैसा शेर है जो दहाड़ना तो छोड़ दीजिए, हिलडुल भी नहीं रहा है।
जिन देशों से हमारे ऐतिहासिक संबंध थे, जिनसे नहीं थे, आज हमारे साथ कौन है, किसी को नहीं पता। हमारे ये दिन आ गए हैं कि नेपाल और बांग्लादेश भी हमें आंख दिखा रहे हैं और डॉगी मीडिया दुमछल्ले इसे मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं।
