मत पूछ मन में अगर सवाल है ये पत्रकारिता का कोरोना काल है
मत पूछ मन में अगर सवाल हैये पत्रकारिता का कोरोना काल है एक की तारीफ़, दूसरे की बुराईजमकर गालियाँ, टांग...
मत पूछ मन में अगर सवाल हैये पत्रकारिता का कोरोना काल है एक की तारीफ़, दूसरे की बुराईजमकर गालियाँ, टांग...
आज की कविता वो दबे-कुचले लोगों की आवाज़ बनता था, वो राजनीति से नाक-भौं सिकोड़ने वाले लोगों को जगाने का...
आज की कविता कृष्ण कान्त एक और दिन शुरू हुआ है आया है अखबार अभी झूठ नया-ताज़ा आया है भक्ती...