Home SliderTop Newsआज की कविताछत्तीसगढ़देश

भूख के विरुद्ध, भात के लिये: किसान सभा का देशव्यापी प्रदर्शन 21 अप्रैल को

IMG 20200419 WA0010

कोरोना महामारी और अनियोजित लॉक डाउन के कारण किसानों, ग्रामीण गरीबों, दिहाड़ी और प्रवासी मजदूरों तथा आदिवासियों के समक्ष उत्पन्न समस्याओं को हल करने के लिए केंद्र सरकार की उदासीनता के खिलाफ अखिल भारतीय किसान सभा ने 21 अप्रैल को भूख के विरूद्ध, भात के लिए नामक विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया है।

यह जानकारी छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने आज यहां दी। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट की सबसे ज्यादा मार समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लोगों को झेलनी पड़ रही है, लेकिन केंद्र सरकार ने लॉक डाउन के दौरान उनकी आजीविका को हुए नुकसान की भरपाई के लिए और खेती-किसानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। यह प्रदर्शन सरकार की इसी असफलता के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अनियोजित लॉक डाऊन के कारण देश के करोड़ों लोगों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा है और वे कोरोना से कम भूख से ज्यादा मर रहे हैं। मोदी सरकार ने 1.7 लाख करोड़ रुपयों का जो आर्थिक पैकेज घोषित किया है, उसमें आम जनता के लिए वास्तविक राहत राशि 70000 करोड़ रुपये भी नहीं है। मोदी सरकार लोगों की रोजी-रोटी को हुए नुकसान की भरपाई किये बिना ही फिजिकल डिस्टेंसिंग के सहारे कोरोना संकट से लड़ना चाहती है, जबकि अब यह स्पष्ट है कि आम जनता को सामाजिक सुरक्षा दिए बिना इस महामारी से लड़ा नही जा सकता।

IMG 20200419 WA0009

किसान सभा नेताओं ने कहा कि किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण गरीबों की समस्याओं की उपेक्षा की जा रही है। जबकि स्थिति इतनी गंभीर हैं कि जिन्दा मुर्गियों (चिकन) का मूल्य 85 रुपये से गिरकर 10 रुपये प्रति किलो हो गया है, पशुपालक किसान आधे दाम पर भी दूध नहीं बेच पा रहे हैं और सब्जी, मछली व अन्य सभी जल्दी खराब होने वाले उत्पादों पर दुकानों, होटलों व रेस्टोरेंट के बंद होने के कारण बेहद गंभीर प्रभाव पड़ा है। अन्य सभी फसलों में भी किसानों को फसल की कटाई के लिए मजदूरों की कमी और परिवहन साधनों पर रोक होने के कारण भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लॉक डाउन के कारण किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने और उस के लिए मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। साथ ही खड़ी फसलों की कटाई और खरीद को लेकर भी कोई ठोस योजना सरकार के पास नहीं है। केंद्र सरकार मनरेगा योजना में लंबित बकाया के भुगतान व ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित करने के लिए भी तैयार नहीं है।

उन्होंने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन के जरिये कृषि कार्यों को मनरेगा से जोड़ने, रबी फसलों, वनोपजों, सब्जियों और दूध को सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने, सभी ग्रामीण परिवारों को 7500 रुपये मासिक आर्थिक सहायता देने, मुफ्त राशन वितरण में धांधली बंद करने, खेती-किसानी और मजदूरी करने वाले सभी लोगों को मास्क, दस्ताने, साबुन या सैनिटाइजर मुफ्त उपलब्ध कराने, शहरों में फंसे ग्रामीण मजदूरों को सुरक्षित ढंग से उनके गांवों में पहुंचाने, खेती-किसानी को हुए नुकसान के लिए प्रति एकड़ 10000 रुपये मुआवजा देने, किसानों से ऋण वसूली स्थगित करने और खरीफ सीजन के लिए मुफ्त बीज, खाद और कीटनाशक देने, राशन दुकानों से दैनिक उपभोग की सभी आवश्यक वस्तुओं को सस्ती दरों पर देने की मांग उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इन मांगों पर अमल करके ही देश में फैलती भुखमरी की समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

पराते ने कहा कि भूख के विरुद्ध, भात के लिए प्रदर्शन गांवों में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने-अपने घर के आंगन, बालकनी या छत पर खड़े होकर, अपनी मांगों की तख्तियां हाथ में लेकर नारेबाजी करके की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *