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बीजापुर में शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा पर सक्रिय पत्रकार गणेश मिश्रा ने खोली पोल

मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र में बताई व्यथा और दुर्दशा

सरकार की शिक्षा नीति और योजनाओं को टूटते बिखरते हुए देखकर बीजापुर के दूरस्थ इलाकों में पिछले 20 से ज्यादा वर्षों से पत्रकार गणेश मिश्रा सक्रिय बेहद ही दुखी मन से मुझे प्रदेश के मुख्यमंत्री को यह पत्र लिखना पड़ रहा है आशा है कि सरकार मेरी इस पुकार को जरूर सुनेगी 

प्रति

माननीय श्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन 

महोदय मेरा नाम गणेश मिश्रा है और मैं बस्तर में तकरीबन पिछले 20-21 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहा हूं और इस समय बीजापुर में INH24 चैनल के लिए बतौर जिला प्रतिनिधि काम कर रहा हूं । मैं विशेष तौर पर जिले में निवासरत अंदरूनी इलाकों के ग्रामीणों की समस्याओं को अपनी खबर और चैनल के माध्यम से सरकार तक पहुंचा कर उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास करता हूं । 

       माननीय इस समय शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों को शिक्षित कर उनके बेहतर भविष्य के लिए आपके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में जो नई योजनाएं लाई जा रही हैं वे बेहद ही सराहनीय है परंतु मुझे यह देखकर बेहद ही दुख होता है कि आपके द्वारा नव निहाल बच्चों के लिए लाई गई यह योजना मैदानी इलाके में शायद बेहतर ढंग से क्रियान्वयन हो रही होगी परंतु बेहद दुख के साथ आपको यह बताना पड़ रहा है कि आपकी यह योजना बीजापुर आते ही दम तोड़ चुकी है । यहां पर शिक्षा विभाग के अधिकारी और अधिकारियों के कार्यालय में पदस्थ बाबू अपने मूल कार्य को छोड़कर ठेकेदारी,शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए वसूली और लाभांश के कार्यों में व्यस्त हैं जिसके चलते आपकी योजना अंदरूनी इलाकों की बात तो दूर बल्कि जिला मुख्यालय के स्कूलों और वहां पढ़ने वाले बच्चों तक नहीं पहुंच पा रही है ।

      महोदय मैं आपको बता दूं की सन 2005 में सलवा जुडूम के दौरान बीजापुर में तकरीबन 350 स्कूलों को नक्सलियों ने महज इसीलिए तोड़ दिया था ताकि उन स्कूल भवनों में सुरक्षा बल के जवान ना ठहर सकें और उसके बाद से ही वो तमाम स्कूल बंद पड़ी थीं परंतु अब धीरे-धीरे उन बन्द स्कूलों को पुनः खोलने का कार्य शुरू किया गया है और वर्तमान में सिर्फ बीजापुर में ही तकरीबन 295 स्कूलों को पुनः संचालित किया जा रहा है और मैं खुद भी करीब 25 से 30 स्कूलों के पुनः संचालन का गवाह हूँ क्योंकि उन स्कूलों को पुनः संचालित करवाने के लिए मैने काफी मेहनत किया था । परंतु अब उनकी दशा और दयनीयता को देखकर बेहद ही पीड़ा होती है, भले ही जितने भी स्कूलों को पुनः संचालित किया गया है वे स्कूल या तो झोपड़िया में चल रहे हैं या फिर ग्रामीणों के घरों में, उधारी के मकानो में, तो कहीं देवगिडियों में संचालित हो रहे हैं महोदय हाल ही में मैं बीजापुर से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पेद्दाकोरमा के मुनगा के दो स्कूलों की रिपोर्टिंग की थी जहां पर तकरीबन 80 बच्चे पिछले दो सालों से खुले आसमान में पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर है बच्चों की इस दयनीय स्थिति से जुड़ी खबर को बीजापुर की जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग सभी अफसरों के अलावा सरकार ने भी देखा परंतु आज तक उन बच्चों को ना तो छत मुहैया कराया गया और ना ही अस्थाई तौर पर शेड का निर्माण कराया गया जिससे बच्चे बेहतर शिक्षा ले पाते,परिणाम स्वरूप बारिश के चलते पिछले एक महीने से मुनगा के दोनों स्कूल बंद पड़े हैं और वहां के नव निहाल और मासूम तकरीबन 80 बच्चे शिक्षा से वंचित है ।

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    खबर का प्रकाशन होते ही बीजापुर शिक्षा विभाग में पदस्थ उच्च अधिकारियों ने शिक्षकों को प्लास्टिक का तिरपाल देकर यह कहा गया की तिरपाल लगाकर बच्चों को पढ़ाया जाए परंतु पेड़ के नीचे तिरपाल लगाकर बच्चों को कब तक शिक्षित किया जा सकता है? जबकि वहां के शिक्षक ईमानदारी पूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और अफसर मौज काट रहे हैं महोदय आपसे करबद्ध निवेदन है कि बीजापुर जिले में व्याप्त शिक्षा विभाग की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए नौनिहाल बच्चों को मिलने वाली सरकार की शिक्षा नीति का लाभ दिलाए और उन तमाम अफसर और कर्मचारियों की कार्य शैली को देखते हुए एक जांच कमेटी बनाएं ताकि विभागीय लापरवाही का पर्दाफाश हो महोदय बेहतर शिक्षा के नाम पर अगर बच्चों के जीवन के साथ इसी तरह  खिलवाड़ होता रहा और इन्हें सही दिशा नही दी गयी तो निश्चित ही ये नावनिहाल आने वाले समय मे देश का भविष्य नही बनेगें बल्कि गलत रास्ता अख्तियार कर सकते है,क्योंकि इस समय ये बच्चे कच्चे मिट्टी के समान है और इन्हें उचित और अनुचित आकार देना हम सबका कर्तव्य है।

अंत में

क्या ऐसे आएगा बदलाव या बीजापुर में विकास का मतलब यही है?

जहां बच्चो को ही शिक्षित नही कर पा रहे है,संसाधनों का भक्षण हो रहा है क्या वहां नक्सलवाद से ऐसे होगी लड़ाई?

नवनिहाल बच्चो के साथ न्याय की उम्मीद के साथ

गणेश मिश्रा बीजापुर

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