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बस्तर बैण्ड ने विदेश में भारत और छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया

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अंतरराष्ट्रीय यात्रा के प्रथम पड़ाव में बस्तर बैण्ड ने 13 अप्रेल को नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में स्थित इंडियन हाई कमीशन में भारत का प्रतिनिधित्व करते अपनी प्रस्तुति से बेहतरीन समा बांधा।इस अवसर पर माननीय अभय ठाकुर ( उच्चायुक्त इंडियन हाई कमीशन अबुजा नाइजीरिया),फेमी अदेसीना (माननीय राष्ट्रपति नाइजीरिया के विशेष सलाहकार),ओटुंबा ओलिसगन रुंसेवे (महा निदेशक ,नेशनल काउंसिल फ़ॉर आर्ट्स एन्ड कल्चर नाइजीरिया),महारानी ज़ैनब ओतीति ऑब्नॉर (फाउंडर ऑफ अरब अफ्रीकन इकोनॉमिक्स) एवं नाइजीरिया के गणमान्य नागरिक ,विभिन्न देशों के कूटनयिक प्रतिनिधि सहित लगभग 600 से अधिक प्रेक्षक उपस्थित थे।
गत 12अप्रेल से विदेश प्रवास पर निकले बस्तर बैण्ड के कलाकारों ने इंडियन हाई कमीशन नाइजीरिया के आमंत्रण पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सहयोग से सांस्कृतिक आदान प्रदान यात्रा के तहत आयोजित भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद स्थापना दिवस पर शाम 7 बजे पद्मश्री अनूप रंजन पाण्डेय के संयोजन और निर्देशन में बस्तर के कलाकारों लक्ष्मी सोड़ी,श्रीनाथ नाग ,रंगबती बघेल,बुधराम सोड़ी, सोमारू नाग,आसमति सलाम ,नवेल कोर्राम,पनकू सोढ़ी, सीमा सलाम,लूदो सोड़ी,विक्रम यादव,आयता नाग ,सन्नू ताती के साथ अपनी प्रस्तुति दी।प्रस्तुति में बस्तर बैण्ड के कलाकारों ने जहाँ बस्तर की पारम्परिक संगीत की बानगी बिखेरी वहीं लगभग 60 से अधिक बस्तर की पारम्परिक प्रचलित लोक एवं दुर्लभ जनजातीय वाद्यों की संगत-संगति में वाद्यों की जुगलबन्दी ने भरपूर सराहना अर्जित की।विभिन्न वाद्यों के विभिन्न पाड़ यानि लय, सुर-ताल के माध्यम से संगीत के सहारे बस्तर ,छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांगीतिक यात्रा ने अत्यधिक वाहवाही बटोरी।

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बस्तर बैण्ड के वाद्यों में गूटा पराय, नर पराय, हुलकी मांदरी, पेण्डुल ढोल,ओझा पराय, नंगूरा ,कुंडिर, डंडार ढोल,ताता-पूती, कासन ढोल,पेन ढोल,गोती बाजा,मिरगिन ढोल,खंजेरी,धनकुल बाजा,किकिड़, डुमिर, राम बाजा,ढुङ्गरु,,सारंगी,ढुसिर, सुलुड़, बोपोर,वेरोटी,देव मोहरी,मांडो मोहरी,बाँस,गूगुनाड़ा, नकडेवन,टेकनी बाँसुरी, अकुम,तोड़ी,नेफरी,कच टेहन्डोर,पक टेहन्डोर,चिटकुली,तिरडुडी,किरकिचा, इरनांग,मुयांग,टुडरा,ठुड़का,कोटोरका,चरहे,सियाड़ी बाजा,झिंटी आदि के संगत में विभिन्न पारम्परिक पाड़ एवं पाटा आदि के अलावा वाद्यों की जुगलबंदी सामूहिक आलाप-गान प्रस्तुत की गयी।एक ही मंच पर एक साथ बस्तर के समूचे वाद्यों की जीवंत उपस्थिति ,भाव भागिमाओं,पदविन्यास ने अंचल एवं प्रदेश के समृद्ध सांगीतिक विरासत की प्रस्तुति ने अन्तराष्ट्रीय प्रेक्षक समुदाय को अत्यधिक प्रभावित किया।प्रस्तुति के बाद बस्तर बैण्ड के कलाकारों को नाइजीरिया के नेशनल काउंसिल फ़ॉर आर्ट्स एन्ड कल्चर के महानिदेशक ओतुनबा ओलउसेगुन रुंसेवे ऑब्नॉर तथा अरब अफ्रीकन इकोनॉमिक्स डेवलपमेंट इनिशिएटिव्ह की संस्थापक महारानी ज़ैनब द्वारा नाइजीरिया के काष्ठ हस्तशिप मूर्ति प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर बस्तर बैण्ड के कलाकारों द्वारा अभय ठाकुर उच्चायुक्त इंडियन हाई कमीशन नाइजीरिया को बस्तर के बेल मेटल से निर्मित शिल्प तोड़ी वाद्य तथा उनकी पत्नी डॉ सुरभि ठाकुर को छत्तीसगढ़ के कोसा सिल्क के शॉल द्वारा सम्मानित किया गया।

इस दौरान इंडियन हाई कमीशन में 14 अप्रेल को इंडो नाइजीरियन कल्चरल एकेडमी और इंडियन हाई कमीशन के संयुक्तयोजन में कार्यशाला की गयी जिसमे नाइजीरियन कलाकार और नाइजीरिया के अप्रवासी भारतीय कलाकारों ने भाग लिया।साथ ही 15 अप्रेल को नेशनल काउंसिल फ़ॉर आर्ट्स सेंटर नाइजीरिया के द्वारा आयोजित कार्यशाला में नाइजीरिया के प्रख्यात कलाकारों की उपस्थिति में वहां के पारम्परिक वाद्य और बस्तर के पारम्परिक वाद्यों के के साथ कार्यशाला कर जुगलबन्दी प्रस्तुत की गयी।

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