नौसेना बेड़ा तबाह, डूब गए USS एरिजोना-ओक्लाहोमा, 188 फाइटर जेट राख… अमेरिका पर सबसे बड़े अटैक की कहानी

ईरान और अमेरिका के बीच जंग चरम पर पहुंच चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोचा नहीं होगा कि ईरान इस जंग में अमेरिका पर इस तरह भारी पड़ेगा. ईरान अमेरिकी नौसेना के ठिकानों पर लगातार बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन बरसा रहा है.
फारस की खाड़ी में मौजूद यूएस कैरियर ग्रुप्स पर ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं. तेहरान का दावा है कि ‘अमेरिकी बेड़ा कमजोर हो चुका है’. ईरान के इस जवाब हमले के बीच अमेरिका को एक बार फिर वह काला रविवार याद आ रहा है, जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 7 दिसंबर 1941 का पर्ल हार्बर पर हमला हुआ था. ठीक उसी तरह जैसे आज ईरान की ‘सप्राइज स्ट्राइक’ ने अमेरिकी नौसेना को झकझोर दिया, 85 साल पहले जापान ने बिना चेतावनी दिए अमेरिका के सबसे बड़े नौसैनिक अड्डे को तबाह कर दिया था. उस हमले ने अमेरिका को द्वितीय विश्वयुद्ध में घसीट लिया. आज फिर वही सवाल… क्या ईरान का हमला पर्ल हार्बर की तरह ‘डे ऑफ इन्फेमी’ यानी बदनामी का दिन बन जाएगा?
7 दिसंबर की वह तबाही
7 दिसंबर 1941 की सुबह भी किसी आम रविवार की तरह अलसाई हुई थी. हवाई द्वीप के पर्ल हार्बर नौसैनिक अड्डे पर शांति पसरी थी. सैकड़ों अमेरिकी सैनिक अभी नींद से उठे ही थे. युद्धपोतों की कतारें ‘बैटलशिप रो’ पर लहरा रही थीं. अचानक आसमान में गड़गड़ाहट हुई. सुबह 7:48 बजे अचानक से आसमान में विमानों की गड़गड़ाहट गूंज उठी. ये सभी जापानी लड़ाकू विमान थे, जो मानो पर्ल हार्बर के ऊपर आसमान पर छा गए थे.
प्रशांत महासागर में मौजूद छह जापानी एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़कर पहुंचे 183 फाइटर जेट ने पर्ल हार्बर पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी है. जापानी टॉरपीडो बमवर्षक, डाइव बमवर्षक और फाइटर जेट ने पहले ही कुछ मिनटों में हेल्दी फील्ड, व्हीलर फील्ड और फोर्ड आइलैंड पर पार्क 188 अमेरिकी फाइटर और बॉम्बर जेट को राख कर दिया.
दुनिया ने पहली बार देखा कामाकाजी विमान
ये कामाकाजी विमान थे, जो अमेरिकी सैनिकों को मारने के बाद खुद मरने के मक्सद से वहां तक आए थे. दुनिया तब पहली इस कामाकाजी शब्द से रूबरू हुई थी. दरअसल जापान से उड़े उन फाइटर जेट्स के पास इतना ईंधन ही नहीं था कि वे वापस सुरक्षित लौट सके. इसलिए उन्होंने आखिर में विमानों को ही हथियार की तरह इस्तेमाल किया और सीधा जाकर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर से टकरा दिया.
इन एयरक्राफ्ट कैरियर पर विमान एक-दूसरे से चिपके हुए थे, कोई उड़ नहीं सका. महज 90 मिनट में अमेरिकी सेना की कमर टूट गई.
