छत्तीसगढ़

तथाकथित विकास की अंधी दौड़ में छत्तीसगढ़ में शायद कागज में ही जंगल बचा रहेगा

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार ने तय कर लिया है कि जंगल चाहे वह हसदेव जैसे प्राकृतिक हो या शहरों के आसपास के प्लांटेशन सभी को खत्म करना है. नई राजधानी रायपुर में ग्राम माना और तूता के बीच 100 एकड़ क्षेत्र में फ़िल्म सिटी का निर्माण किया जा रहा है. इस परियोजना के लिए लगभग 2 हज़ार पेड़ो को काटा जा रहा है जिसमे लगभग 200 पेड़ो को काट दिया गया है.

नई राजधानी का निर्माण 41 गाँव की जमीन को अधिग्रहित करके हुआ है जिसमे अभी भी हजारों एकड़ जमीन खाली पड़ी है जिसमे पेड़ नहीं है लेकिन फ़िल्म सिटी का चयन उस जगह पर किया गया जो पहले राजस्व जंगल था और इसे पर्यटन के विकास हेतु छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल को सौंपा गया था.

रायपुर शहर का यदि AQI ईमानदारी से मापा जाए तो देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल होगा . PM 2.5 और PM 10 न्यूनतम से कई गुना ज़्यादा होगा. रायपुर शहर एक तरफ़ से 3 बड़े उद्योगिक क्षेत्रों से सिलतरा, उरला और बोरझरा से घिरा हुआ है जहाँ लगभग 70 प्रतिशत उद्योग कोयला आधारित हैं.

दुनिया की सबसे प्रदूषित उद्योगिक इकाई स्पाँज आयरन की लगभग 50-60 इकाई इन उद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित हैं जिनका प्रदूषण तबाही मचा के रखा हुआ है . रायपुर शहर के किसी भी घर की छत में सुबह एक काली परत जमा मिलती है . तथाकथित विकास के नाम पर रायपुर शहर के वर्षों पुराने पेड़ो को काट कर कांक्रीट का जंगल बना दिया गया है. अब थोड़े बहुत पेड़ जो आसपास के गाँव में बच्चे हैं उन्हें भी काटने का दौर चल पड़ा है.

इस तथाकथित विकास की अंधी दौड़ में छत्तीसगढ़ में शायद कुछ भी प्राकृतिक बचा न रहे. आज लगभग सभी नदियाँ गंभीर प्रदूषित हो चुकि हैं, खनन के नाम पर जंगल और पहाड़ गायब होते जा रहे है बस काग़ज़ी आंकड़ों में 44 प्रतिशत जंगल बचा है और वह अन्तिम जंगल काटने तक इतना ही बचा रहेगा.

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