हाई-टेंशन तार की चपेट में आने से मादा भालू और दो शावकों की मौत

कटघोरा वन मंडल में जमीन के करीब झूल रहे हाई-टेंशन तार ने ली तीन भालुओं की जान; ग्रामीणों ने की थी पहले भी शिकायत।
कोरबा, 27 मार्च — छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा वन मंडल में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ बिजली के हाई-टेंशन तार की चपेट में आने से एक मादा भालू और उसके दो शावकों की मौके पर ही मौत हो गई। शुक्रवार की सुबह स्थानीय ग्रामीणों ने जंगल के भीतर इन तीनों भालुओं के शव देखे, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
शुरुआती जांच के अनुसार, भालुओं का यह परिवार झाड़ियों के बीच से गुजर रहा था, तभी वे जमीन के बेहद करीब लटक रहे एक हाई-वोल्टेज बिजली के तार के संपर्क में आ गए। करंट इतना शक्तिशाली था कि तीनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची और शवों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब कोरबा के जंगलों में बेजुबान जानवरों को बिजली विभाग की लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी हो। कटघोरा का यह इलाका भालुओं का मुख्य रहवास माना जाता है, लेकिन जंगल के बीच से गुजरने वाली जर्जर बिजली लाइनें इनके लिए मौत का जाल बन गई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार झूलते तारों की शिकायत की थी, लेकिन मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई।
वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “एक साथ तीन भालुओं की मौत पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ी क्षति है। स्लॉथ भालू (Sloth Bear) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित हैं, इसलिए यह एक गंभीर आपराधिक मामला है।”
लेकिन सवाल यह है कि इस मौत का जिम्मेदार कौन है?
अक्सर बिजली विभाग तेज हवा या पेड़ की टहनियों को तार झूलने का कारण बताकर पल्ला झाड़ लेता है। लेकिन ज़मीनी हकीकत विभाग की अनदेखी बयां करती है। जब एक मां और उसके दो नन्हे शावक चंद सेकंड में राख हो जाते हैं, तो इसे केवल ‘हादसा’ कहना सिस्टम की नाकामी को छिपाने जैसा है।
पूरी रिपोर्ट और तस्वीरें यहाँ देखें: https://rootsalert.com/korba-sloth-bears-killed-electrocution/
वन विभाग ने भालुओं के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है ताकि आधिकारिक तौर पर करंट से मौत की पुष्टि हो सके। साथ ही, बिजली विभाग के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। यदि जांच में यह साबित होता है कि तारों का रखरखाव सही नहीं था, तो संबंधित अधिकारियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक मादा भालू और उसके बच्चों के खत्म होने से कोरबा में भालुओं की आबादी के संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा। जैसे-जैसे इंसानी दखल और बुनियादी ढांचे का विस्तार जंगलों की ओर बढ़ रहा है, ऐसे घातक हादसे एक खौफनाक रूटीन बनते जा रहे हैं।
क्या विकास की कीमत इन बेजुबान जीवों का अस्तित्व मिटाकर चुकाई जाएगी?
फिलहाल, वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए कहा है और बिजली विभाग के साथ मिलकर संवेदनशील क्षेत्रों में तारों की ऊँचाई बढ़ाने का वादा किया है। अब देखना यह है कि यह वादा ज़मीन पर उतरता है या अगली किसी बड़ी घटना का इंतज़ार किया जाएगा।
