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सिंहदेव की शर्मिंदगी का मतलब छतीसगढ़ की कांग्रेस सरकार में सब कुछ ठीक नही चल रहा

बेरोजगारी भत्ता का पता नही, किसानों की उधारी ढेड़ साल में भी चुकता नही, जनघोषणा पत्र का अता-पता नही

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प्राण चड्डा

रायपुर । क्या छतीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार में सब कुछ ठीक और तालमेल से चल रहा है। ऐसा है तो फिर जिम्मेदार मंत्री टीएस सिंहदेव, के ऐसे बयान क्यो आ रहे हैं, जिसमें वह किसानों की बकाया राशि और शिक्षा विभाग में लंबित चल रही नियुक्तियो पर मुखर हैं। टीएस भूतपूर्व सरगुजा रियासत के वारिस और शालीन व्यक्ति हैं।
बीते विधान सभा चुनाव बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के लिए विधान सभा चुनाव बाद गम्भीर दावेदार रहे टीएस सिंहदेव इस वक्त बघेल सरकार से सन्तुष्ट नहीं लग रहे। हाल में उनके दो बयान, किसान को 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान के मूल्य की बकाया पूरी राशिनई फसल के पहले नहीं मिली तो पद इस्तीफा दे देंगे। यह बात उन्होंने टीवी शो में कही है। शिक्षा के क्षेत्र में कई माह से लंबित नियुक्तियां नहीं होने पर जो बयान दिया है,उससे लगी भी आग के धुएं का पता लगता है।
उधर बघेल सरकार ने सरकारी पक्ष रखने के लिए दो मंत्रियों के नाम जारी किए हैं, जिसमें रविन्द्र चौबे और मोहम्मद अकबर का नाम है, इसमें टीएस सिंहदेव का नाम नहीं है।
वर्तमान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, की 90 सीटों में 69.के पास हैं।इससे बघेल सरकार की स्थिति मजबूत है,लिहाजा आलाकमान निश्चित होगा कि मप्र सा कोई खेल छतीसगढ़ में कभी और कदापि मंचित नहीं होगा। पर वरिष्ठ मंत्री टीएस के ऐसे बयान क्यों आ रहे हैं कि धान का मूल्य 2500 रुपये क्विंटल का बकाया, जिसे सरकार चार किश्तों में देने वाली है और अभी एक क़िस्त ही दे सकी है।बाकी रकम किसानों को सरकार नई फसल तक नहीं देगी तो वह इस्तीफा दे देगें। सरगुजा में दिए एक उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में चयनित प्रत्याशियो की नियुक्ति लंबित होने पर कहा वो शर्मिंदा हैं। यह 14 माह से लंबित चल रही हैं।बहरहाल स्वस्थ्य व पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव बयान राजनीतिक हल्कों में गम्भीरता से लिया गया है। उनके इस बयान से बीजेपी को तो मन चाही मुराद मिल गयी है। पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह तथा पूर्व निकाय मंत्री और भाजपा नेता अमर अग्रवाल ने कहा कि–सिंहदेव ने फिर भी शर्मिंदगी जता दी वर्ना जनमत के नाम लोकतांत्रिक हदों को टूटते राज्य की प्रदेश की जनता देख रही है।उन्होंने कहा- वादाखिलाफी और विविध नौटंकियों का एक दिन यही हश्र होना था।
क्या बघेल सरकार में सब ठीक चल रहा है, या कोई चिंगारी सुलग रही है, फिलहाल इसके लिए भविष्य का झरोखा खुलना अभी बाकी है। वैसे यह भी कहा जा सकता है कि पार्टी में तानाशाही नहीं हर सदस्य को अपने विचार रखने की छूट है।

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प्राण चड्डा

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