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शराब घोटाला : लखमा को मोहरा बनाया गया

किसी भी प्रदेश का राजस्व सबसे ज्यादा आबकारी और उद्योग से आता है । ऐसे महत्वपूर्ण विभाग को लखमा को सौंपने के पीछे बस कारण यह था कि केवल उनके अंगूठे का प्रयोग करना था । लखमा की बस एक ही गलती है कि उसने मंत्री पद स्वीकार किया वह केवल विधायक ही बनकर रहता तो शायद आज जेल में नहीं होता

      राजनीतिक हलकों में चर्चा है और कई लोग बता रहे हैं कि लखमा तो एक ट्रांसफर भी नहीं कर सकता था नाम का मंत्री था । चर्चा है कि यहां तक की आबकारी विभाग का उप सचिव जो अभी जेल में है अरुण पति त्रिपाठी भी उनकी बात नहीं मानता था और यह भी कि त्रिपाठी सीधे मुख्यमंत्री भवन से जुड़े हुए थे । आबकारी मंत्री वह विभाग के सचिव निरंजन दास के दस्तखत के बाद भी फाईल आगे नहीं बढ़ती थी , जब तक एपी त्रिपाठी उसमें  दस्तखत नहीं कर देता था ।  

       ये देश का पहला मामला है कि एक ही व्यक्ति दो राज्यों मैं आबकारी विभाग के मुख्य अधिकारी का काम निभाएं । मगर यह संभव हुआ छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार और झारखंड की सरकार की मिली भगत से । अरुण पति  त्रिपाठी देश के ऐसे पहले अधिकारी हैं जिन्हें दो राज्यों से तनख्वाह मिलता था । त्रिपाठी को छत्तीसगढ़ से भी तनख्वाह मिलता था और झारखंड से भी मिलता था। केवल कोरोना कल को छोड़ दें तो त्रिपाठी हर महीने कनाडा जाता था । कनाडा आने जाने का खर्चा किसी भी हालत में 5 लाख से कम नहीं है जबकि उनकी तनख्वाह 5 लाख नहीं थी ।


     ध्यान रहे कि त्रिपाठी ने अपने बच्चों को पहले ही कनाडा पढ़ने के लिए भेज दिया था और सरकारी नौकरी में पदस्थ पत्नी को त्यागपत्र दिलवा कर कनाडा भिजवाया दिया था । मतलब तय था कि सारे घोटाले करने के बाद उन्हें देश से भागना था ।  यह त्रिपाठी वही त्रिपाठी हैं जब भाजपा के रमन सिंह के कार्यकाल में आबकारी घोटाला को लेकर जब कांग्रेस कार्रवाई कर रही थी तो जिम्मेदार अधिकारी समुन्द सिंह ने लंबे समय तक फरारी काटी थी । तब उनके सहायक के रूप में एपी त्रिपाठी ही थे । उनके भ्रष्टाचार के अनुभव के कारण ही कांग्रेस ने उन्हें आबकारी विभाग में घोटाले की जवाबदारी दी थी  । तब यह सब कहानी पत्रकारों द्वारा ओपन किए जाने के बाद भी अगर भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की तो इसका सीधा मतलब निकलता है कि भूपेश बघेल इन घोटालों में सीधे शामिल थे या उनका खुला समर्थन था ।

   भूपेश बघेल का लड़का चैतन्य किसी सामान्य आम आदमी का लड़का नहीं था, बल्कि प्रदेश के  मुख्यमंत्री का लड़का था ।  तब  क्या वह बिना अपने पिता की जानकारी के सौ सौ करोड़ का भ्रष्टाचार कर सकता था  ? प्रश्न यह भी उठता है कि सौम्या चौरसिया जो एसडीएम स्तर की अधिकारी थी उसको मुख्य सचिव के भी ऊपर बिठा के रखे थे । मुख्य सचिव सहित सभी विभागों के सचिव को “स्पीक टू सौम्या” का आदेश दिया जाता था । अतः क्या सौम्या के किए गए सारे कर्मों में भूपेश बघेल की भागीदारी नहीं है ? आखिर भाजपा की वर्तमान सरकार को किस प्रकार के डील होने की प्रतीक्षा है ? जिसकी वजह से मुख्य आरोपी अभी भी पकड़ कर बाहर है । निश्चित रूप से यह भी जांच का विषय है ।

    पूरी दुनिया जानती है कि भूपेश बघेल ने सौम्या को धरती के किस कोने से खोज कर लाया था और अपने बंगले में बिठाया था । यहां तक मंत्रियों और सलाहकारों को भी मुख्यमंत्री से मिलने के लिए सौम्या से परमिशन लेना पड़ता था । कुल मिलाकर सौम्या चौरसिया को सुपर सीएम का दर्जा मिला हुआ था ।
       
        यह सौम्या चौरसिया वहीं एसडीएम है जिसने पाटन में रहते समय पाटन के एसडीएम रहते समय भूपेश बघेल के जमीनों की नाप जोख करवाई थी, और भूपेश बघेल पर कार्रवाई करने की कोशिश किया था ।  तब भूपेश बघेल और उनके बीच विवाद हुआ था, मामला पुलिस थाने तक पहुंचा था । दोनों पक्षों की तरफ से रिपोर्ट लिखा गया था और उसके बाद चार-पांच साल बाद अचानक ऐसा क्या घटना घट गया कि दोनों एक दूसरे से प्रभावित हो गए और बघेल ने सौम्या को पूरा पूरा छत्तीसगढ़ का राज पाट  सौंप दिया ?

भूपेश बघेल मुख्यमंत्री के बंगले में कोई भी सामान्य आदमी नहीं घुस सकता था यहां तक के कांग्रेस पार्टी के भी नेताओं को घुसने के पहले अनुमति लेना पड़ता था मगर एजाज देवर और उसके भाई अनवर देवरा की गाड़ियां जो है मुख्यमंत्री बंगले में बिना गेट में रुके अंदर प्रवेश करती थी इन गाड़ियों में क्या जाता था और किस आधार पर उनको बिना परमिशन के अंदर घुसने की अनुमति मिली हुई थी


      कवासी लखमा बस्तर के सुकमा कोंटा हो नहीं बल्कि संपूर्ण बस्तर क्षेत्र का एक जन नेता है और जनता के साथ जुड़े रहने के कारण ही वह लगातार पांच बार विधायक बने सीधे सरल व्यक्ति के रूप में भी उनको जाना जाता है, और उनके बयानों को लेकर मजाक उड़ाया जाता है क्योंकि वह सीधे सरल शब्दों में बिना षड्यंत्र के कोई भी बात बोल देता था ।
  लखमा की बस एक ही गलती है कि उसने मंत्री पद स्वीकार किया वह केवल विधायक ही बनकर रहता तो शायद आज जेल में नहीं होते।