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मैं बीजेपी नहीं जाऊंगा, डोली रख दो कहारो !!

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आज की कविता

मैं बीजेपी में नही जाऊंगा डोली रख दो कहारो
महीने दो महीने नही जाऊंगा डोली रख दो कहारो
मैं बीजेपी नही जाऊंगा डोली रख दो कहारो

पहला संदेसा शा जी का आया
पहला संदेसा शा जी का आया
अच्छा बहाना ये मैने बनाया
ओ काली दाढ़ी वाले के संग नही जाऊंगा
डोली रख दो कहारो
साल दो साल नही जाऊंगा
डोली रख दो कहारो

दूजा संदेसा वसुंधरा जी का आया
दूजा संदेसा वसुंधरा जी का आया
बुढ़िया ने पाँच साल मुझको सताया
इस बुढ़िया को, इस बुढ़िया को अब मैं सताऊँगा
डोली रख दो कहारो
महीने दो महीने नही जाऊंगा डोली रख दो कहारो

तीजा संदेसा सिंधिया जी का आया
तीजा संदेसा सिंधिया जी का आया
एमपी में सरकार गिरा मुझको ललचाया
पर मुख्यमंत्री तो उसको भी नही बनवाया
डोली रख दो कहारो
महीने दो महीने नही जाऊंगा डोली रख दो कहारो

चौथा संदेसा ससुर जी का आया
चौथा संदेसा ससुर जी का आया
मैं चल पड़ा मगर याद मुझे आया
मुझको उप राज्यपाल तो बनवाओ
डोली रख दो कहारों
महीने दो महीने नही जाऊंगा डोली रख दो कहारो

पाँचवा संदेसा मेरे मोई जी का आया
पाँचवा संदेसा मेरे मोई जी का आया
कोई बहाना ना फिर याद आया
बड़ा सा सूटकेस जो मुझको दिखलाया
नंगे पाव मैं नंगे पाव मैं दौड़ा चला जाऊंगा
डोली को गोली मारो
कांग्रेस वापस मैं लौटके ना आऊँगा
मोईजी से लिपट मैं जाऊंगा
बीजेपी की सूनी सेज सज़रिया सजाऊँगा
नोटो का बिस्तर बना हाए बिच्छ मैं जाऊंगा

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गिरीश मालवीय

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