पीएम केयर्स फंड : कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है…

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प्रधानमंत्री कार्यालय ने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिए हैं कि ‘PM CARES फंड, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष और राष्ट्रीय रक्षा कोष से जुड़ा कोई भी सवाल लोकसभा में नहीं उठाया जा सकता। ये फंड सरकार के सीधे नियंत्रण या जिम्मेदारी में नहीं आते।’

अब वे पुराने सवाल फिर से जीवित हो गए हैं। सरकार कोर्ट में भी कह चुकी है कि यह निजी फंड है। अगर यह निजी फंड है तो यह प्रधानमंत्री के नाम पर क्यों चलता है?

प्रधानमंत्री खुद जिसके चेयरमैन हों, गृहमंत्री, रक्षामंत्री व वित्तमंत्री इसके ट्रस्टी हों, वह निजी कैसे हैं? वह सवालों से परे कैसे है?

पीएम केयर्स फंड में सरकार की हिस्सेदारी वाली 57 कंपनियों ने कुल 2,913.60 करोड़ रु दान किए। पूरे देश में सरकारी कर्मचारियों के वेतन से जबरन पैसे काटकर पीएम केयर्स फंड में डाले गए। यह सब निजी कैसे है?

इस फंड में बड़े उद्योगपतियों से लेकर चीनी कंपनियों तक ने दान किया। यह ​सब जिम्मेदारी से परे और गुप्त कैसे हो सकता है? क्या सरकारी कंपनियां निजी हैं?

क्या प्रधानमंत्री पद निजी है? क्या प्रधानमंत्री के अगुआई वाली कोई संस्था गुप्त हो सकती है?

पहले से प्रधानमंत्री राहत कोष मौजूद था, जो पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था थी। सरकार उसका ऑडिट कराती थी और ऑडिट रिपोर्ट जारी होती थी। पीएम केयर्स का मामला इसके उलट है।

क्या छुपाया जा रहा है? किस बात की पर्देदारी है? क्या अब इस तरह खुला भ्रष्टाचार होगा कि पद पर बैठा व्यक्ति अपने पदनाम से फंड बनाकर उसे गोल कर जाएगा?

कृष्णकांत