नेपाल क्यों बर्बाद हो रहा है…
1.भ्रष्टाचार चरम पर था लेकिन नीतिगत रूप दे दिया गया और पूंजीपतियों के हवाले देश कर दिया गया।
- महंगाई चरम पर थी लेकिन जनता की नहीं सुनी जा रही थी और मीडिया सत्ता को कवर-अप दे रहा था।
3.सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके व मीडिया को सरकारी मुखपत्र बनाकर विपक्ष को खत्म कर दिया गया।
- बेरोजगारी चरम पर जा रही थी लेकिन युवाओं को धर्म की बूंटी दी जा रही थी।भूखे भजन न होय गोपाला यानि पेट की आग धर्म से शान्त नहीं हो सकती।
- भारत सहारा था लेकिन चीन की गोद में बैठने की जिद्द रिश्ता खराब कर गई।
6.विपक्ष न के बराबर था तो आक्रोश थामने का कोई सेफ्टी वाल्व भी नहीं था।युवा आक्रोशित व अनियंत्रित होने लगे।

7.सोशल मीडिया के माध्यम से युवा अभियान चला रहे थे तो पहले सोशल मीडिया सेंसरशिप करने की कोशिश की गई लेकिन कंपनियों ने मना कर दिया।सरकार ने सोशल मीडिया ही बैन कर दिया तो युवा सड़कों पर उतर आए।
- जब छात्र/युवा सड़कों पर आए तो उनका नेतृत्व करने के लिए विपक्ष तो था नहीं और अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने युवाओं को भीतर ही भीतर पुश-अप किया।युवा हिंसक हुए और नतीजा आपके सामने है।
9.जिस देश का नेतृत्व पूंजीपतियों की दलाली पर उतर जाए, धर्म को राजनीति का हिंसा बना ले,पूंजीपति अपने थिंक टैंक बनाकर विदेश नीति बनाने लगे तब वो पूंजीवादी शक्तियों के चंगुल में फंस जाता है। म्यांमार से शुरू हुई लड़ाई पाकिस्तान,श्रीलंका,बांग्लादेश से होते हुए नेपाल तक पहुंच गई।
आज हम कहाँ खड़े हैं ? जो इन देशों में हुआ है वो भारत में भी तैयार है।अमेरिका सक्रिय हो चुका है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए काम पर लग चुकी है। आज कोई देश वर्तमान सरकार के साथ नहीं है। ऐसे मौके पर अमेरिका को कौन रोकेगा ?
भारत की वर्तमान सत्ता ने भीतर ही भीतर बहुत सारे राष्ट्र खड़े कर दिए हैं। जाति के नाम पर,धर्म के नाम पर, संस्कृति के नाम पर,क्षेत्र के नाम पर बहुत से राष्ट्र तैयार हैं और सत्ता से नाखुश हैं।
जो तत्व इन पड़ोसी देशों में अमेरिकी खुफिया एजेंसी के लिए पोषक बने थे वो सारे तत्व वर्तमान सत्ता ने तानाशाही की हनक में भारत में तैयार कर दिए हैं।
भारतीयों के खून से विदेशियों की गुलामी करने का अवगुण अभी तक गया नहीं है। निज स्वार्थ में गद्दारी करने से कभी नहीं हिचकेंगे।
आप सोशल मीडिया ही देख लीजिए हर दूसरा भारतीय लिख रहा है हमारे वाले का नंबर कब आ रहा है,झोला लेकर कहाँ भागेगा,झोला कब उठाएगा! मतलब देश की बर्बादी पर जश्न मनाने को तैयार बैठे हैं।
मुझे दुःख इस बात का हो रहा है कि इस देश को हमारे पुरखों ने खून-पसीने से सींचा है। वर्तमान सत्ता की हनक व भविष्य की आशंका मात्र भयावह सपने की तरह है…!!!
