थूकता हूं ऐसे समाज और न्याय व्यवस्था पर।
रेपिस्ट कुलदीप सेंगर को ज़माथूकता हूं ऐसे समाज और न्याय व्यवस्था पर।नत देने वाले दो जज।
नाम–सुब्रमण्यम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर। इनके नाम के आगे जस्टिस शब्द को इन्होंने कलंकित किया है।



उम्रकैद की सज़ा काट रहे उस दुर्दांत अपराधी के लिए, जिस पर FIR करवाने के लिए गैंगरेप पीड़िता को योगी आदित्यनाथ के घर के सामने खुदकुशी की कोशिश करनी पड़ी।
दोनों जजों ने कल पीड़िता को उस पुलिस के हवाले कर दिया, जिसने कस्टडी में उसके पिता को मार डाला।
पिता की हत्या के चश्मदीद को भी कुलदीप ने मरवा दिया।
खुद पीड़िता को कुलदीप ने अपाहिज़ बनाने की कोशिश की।
स्त्री को आदिशक्ति बताने वाले इस ढोंगी देश ने कल इंसाफ़ की गुहार लगाती पीड़िता को कूड़े की तरह सड़क से उठाकर फेंक दिया।
हिंदू राष्ट्र में स्त्री तभी आदिशक्ति है, जब वह घर से लेकर बाहर तक हर कदम पर बलात्कार सहती रहे। चुपचाप।
विरोध न करे। लड़े नहीं। सोचे भी नहीं।
तभी वह बहू, बेटी, बहन और मां का दर्ज़ा पाएगी।
या फ़िर खुदकुशी कर ले। समाज उसे बलिदानी का दर्ज़ा देगा।
थूकता हूं ऐसे समाज और न्याय व्यवस्था पर।
