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जिसने अमेरिका को झुकने पर मजबूर किया उसकी कहानी जान लो

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अली लारिजानी
नाम सुना होगा…
लेकिन असली कद नहीं जानते होंगे।

तीन किताबें… वो भी Immanuel Kant पर।
द मैथमेटिकल मेथड इन कांट्स फिलॉसफी
मेटाफिजिक्स एंड द एग्जैक्ट साइंसेज़ इन कांट्स फिलॉसफी
इंट्यूशन एंड द सिंथेटिक ए प्रायोरी जजमेंट्स इन कांट्स फिलॉसफी

मतलब साफ है…
ये आदमी सिर्फ सत्ता नहीं समझता था…
ये सोच को नियंत्रित करना जानता था।

जहाँ ज़्यादातर नेता सिर्फ भाषण देते हैं…
वहाँ ये गणित + कंप्यूटर विज्ञान + दर्शन से व्यवस्था चलाता था।

ईरान को उसने एक नई दिशा दी…
झुकने की नहीं…
टकराने की।

परमाणु वार्ता में जब अमेरिका ने शर्तें रखीं…
तो जवाब था:
“कीमती मोती के बदले टॉफी?”

ये सिर्फ बयान नहीं था…
ये ऐलान था कि
ईरान अब झुकेगा नहीं।

चीन के साथ 25 साल की रणनीतिक साझेदारी…
उसकी सबसे बड़ी चाल थी।

उसने दुनिया को साफ संदेश दिया—
अगर पश्चिम दबाव बनाएगा…
तो पूर्व के साथ नई ताकत खड़ी होगी।

और यही वजह थी कि
अमेरिका को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।

विडंबना ये थी कि
जिस व्यवस्था को वो चुनौती देता था…
उसी अमेरिका में उसकी बेटी डॉक्टर थी।

लेकिन उसने कभी अपने देश की नीतियों को कमजोर नहीं होने दिया।

17 मार्च 2026…
इजरायल के हवाई हमले में मृत्यु।

लेकिन सच ये है…
ऐसे लोग मरते नहीं हैं।

वो एक सोच छोड़ जाते हैं—
झुको मत… झुकाओ।

क्या आज हमारे पास ऐसे नेता हैं?
जो देश के मिट गए लेकिन झुके नहीं ।

अपूर्व भारद्वाज

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