
पूरी दुनिया मध्य पूर्व में हो रही झड़पों को देख रही है, लेकिन “शक्ति का केंद्र” फारस की खाड़ी में एक छोटा सा, T-आकार का खर्ग द्वीप है। वाशिंगटन ईरान को चारों तरफ से घेरने के बाद अब उसकी आर्थिक नस (तेल) को दबाने की कोशिश कर रहा है, यह टर्मिनल दुनिया का सबसे खतरनाक केंद्र बन गया है।
खर्ग द्वीप महज़ एक टर्मिनल नहीं है; यह ईरान की जीवन रेखा है। ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90% हिस्सा इसी एक जगह से जाता है।
खर्ग पर अमेरिकी हमला ईरान की अर्थव्यवस्था का पूरी तरह गला घोंट दे सकता है। ट्रंप प्रशासन ने इसपर हमले को लेकर चर्चा कर चुका है। एक्सियोस (Axios) और द न्यू अरब (The New Arab) की विस्तृत रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार इस द्वीप पर कब्ज़े के विचार को एक “आसान और स्पष्ट विकल्प” (no-brainer) मान रहे हैं, ताकि बड़े पैमाने पर ज़मीनी युद्ध के बिना ईरान पर दबाव बनाया जा सके। इसके बावजूद अमेरिका खर्ग पर हमला करने से हिचकिचा रहा है ।
अमेरिका की इस हिचकिचाहट का कारण सिर्फ ईरान का पलटवार नहीं है, बल्कि चीन को मिलने वाली सीधी चुनौती है। खर्ग से निकलने वाले तेल का लगभग 90% हिस्सा सीधे चीन जाता है। बदले में, बीजिंग वह पैसा और बुनियादी ढांचा मुहैया कराता है जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है।
इस द्वीप पर हमला करना चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर हमला करने जैसा है।
वाशिंगटन के मन में यह डर साफ है: खर्ग पर हमला करने का मतलब है चीन की सेना को सीधे युद्ध का निमंत्रण देना।
चीन अब दर्शक दीर्घा में नहीं बैठा है। वह एक रक्षक की भूमिका में आ गया है। फारस की खाड़ी में अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाकर और रूस व ईरान के साथ मिलकर “मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026” जैसे युद्धाभ्यास करके, बीजिंग ने एक तरह से “मानवीय ढाल” (human shield) तैयार कर दी है।
चीनी युद्धपोतों की वहां मौजूदगी का मतलब है कि अमेरिका या इजरायल के किसी भी हमले में चीनी जहाज को नुकसान पहुंचने का खतरा है, जिससे दो महाशक्तियों के बीच सीधा युद्ध छिड़ सकता है।
इस हमले के आर्थिक परिणाम बेहद भयानक होंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतें जल्द ही $100 के पार पहुँच सकती हैं।
अगर खर्ग तबाह हो जाता है, तो ईरान के तेल की अचानक कमी और खाड़ी देशों में फैली दहशत दुनिया में तेल की भारी किल्लत पैदा कर देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कच्चे तेल की कीमतें $200 प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी आ जाएगी।
क्या दुनिया अमेरिका की ऐसे किसी दुस्साहस से पैदा हुए $200 के तेल संकट को बर्दाश्त कर पाएगी?
खर्ग द्वीप की स्थिति एक ऐसी उलझन बन गई है जहाँ अमेरिका निशाना तो साधना चाहता है, लेकिन इसकी कीमत—चीन के साथ युद्ध और वैश्विक आर्थिक तबाही—फिलहाल वाशिंगटन की बर्दाश्त से बाहर है।
अपनी नजरें खर्ग द्वीप पर बनाए रखें।
