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मिडिल ईस्ट में बिसात सज चुकी है।

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कल शाम के यूट्यूब पॉडकास्ट में भी यही सवाल उभरा कि ईरान पर हमला होगा या नहीं?

जिस समय यह सवाल उठा, उसी समय बहरीन से ये आखिरी जंगी जहाज भी जंग के लिए निकल पड़ा था।

कल ईरान को ट्रंप से मिली 15 दिन की मोहलत खत्म हो रही है। कल ही नरेंद्र मोदी इजरायल से एक और डील करने पहुंच रहा है।

यह है इजरायल के साथ सुरक्षा की डील–जो अमेरिका के इशारे पर कराई जा रही है, ताकि ईरान पर हमले की सूरत में भारत के लोकतंत्र को इजरायल के साथ खड़ा दिखाया जा सके।

ट्रंप को पता है कि मोदी को अब एप्स्टीन के आगे मुजरे की जरूरत नहीं। भारत पहले ही बिक चुका है। लोकतंत्र भी।

अब आगे ट्रंप के कहने पर भारत को हर वह गलत काम करना होगा, जो पिछली सरकारों ने नहीं किए।

मोदी 26 की शाम को तेल अवीव से रवाना होगा और उसी घड़ी में ईरान पर हमले की टिक–टिक शुरू हो जाएगी।

26 से ही जेनेवा में ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर आखिरी बातचीत होगी।

अगर ईरान अपने परमाणु बम कार्यक्रम को शून्य पर लाने में सहमत नहीं होता, तो 2 मार्च को हमला तय है।

इस एक हफ्ते के समय में सारी तैयारियां और ट्रंप की अनुमति ले ली जाएगी।

सोमवार 2 मार्च को पुरीम डे है। इजरायल में छुट्टी होती है। यह दिन यहूदी लोगों को खत्म करने के लिए ईरानी साजिश को नाकाम बनाने की याद में मनाया जाता है।

मेरे कई सूत्रों और विदेशी रिपोर्टर इसी दिन को हमले की तारीख मान रहे हैं।

नेतन्याहू खुद ईरान पर हमले के समर्थन में आजकल दस्तखत जुटा रहा है।

जिस दिन हमला होगा, उस दिन वह कहेगा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र 48 घंटे पहले हमारे साथ खड़ा था।

वह भारत की मौजूदगी को समर्थन बताएगा। वहीं, गोदी मीडिया के कुकुर उसे मुसलमानों के खिलाफ मोदी का मास्टरस्ट्रोक बताएंगे।

एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक, जिसमें ईरान में काम करने वाले सैकड़ों लोगों को उनके हाल पर मरने को छोड़ दिया गया।

कोई नहीं जानता कि ईरान में इस वक़्त कितने भारतीय हैं। किसी को फिक्र नहीं। कैसे लौटेंगे? कब तक?

माहे रमज़ान में उन सभी की महफूज़ वापसी की दुआएं कीजिए।

और एक बार फ़िर जायोनिस्ट के साथ खड़ी मोदी सत्ता को लानत भेजिए।

दुनिया देख रही है मोदी सत्ता का नंगा नाच।

वरिष्ठ पत्रकार सौमित्र राय की पोस्ट

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