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देश नेहरू जैसे प्रधान मंत्री के अभाव का दंश झेल रहा है

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आरक्षण कैसे दे सकती है सरकार? यह समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है। अब देश आज़ाद है। सवर्ण-अवर्ण सब बराबर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ज़मींदारी कैसे ख़त्म कर सकती है सरकार? संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार है। ज़मींदारों से ज़मीन छीनना संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन होगा।

पंडित नेहरू हैरान हुए पर चुप न बैठे। उन्होंने संविधान संशोधन कराया और नौवीं अनुसूची में ऐसे तमाम मुद्दों को डाल दिया। सुप्रीम कोर्ट के हाथ बँध गये। नेहरू ने माननीय न्यायाधीशों को याद दिलाया- सिर्फ ‘लेटर्स’ न पढ़ो, ‘स्पिरिट’ भी देखो संविधान की।

वह पहला संविधान संशोधन था!

सुप्रीम कोर्ट के जज साहब की जाति और उनकी ज़मींदाराना पृ्ष्ठभूमि ने उनमें संविधान के भाव का अभाव पैदा कर दिया था।

लेकिन आजादी की लडाई की ताप में पके नेहरू के संकल्पों की राह में कोई कोर्ट बाधा नहीं बन सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट आज भी उसी भाव में है। बस, देश नेहरू जैसे प्रधानमंत्री के अभाव का दंश झेल रहा है!

पंकज श्रीवास्तव

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