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बरबसपुर और बडग़ांव में रोज हो रहे करोड़ों के अवैध रेत का उत्खन्न, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, खनिज विभाग आखिर क्यों है मौन

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महासमुन्द। छत्तीसगढ़ के उच्चन्यायलय ने 15 अक्टूबर तक रेत के घात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है लेकिन महासमुन्द जिले में इसका कोई असर नहीं दिख रहा है और कानून कायदों की बड़ी-बड़ी बात करने वाले अधिकारियों के नाक के नीचे खुलेआम शहर से लगे ग्राम बरबसपुर और बडग़ांव में रोजाना एक हजार से 1500 सौ टेक्टरों में अवैध रेत का उत्खन्न जारी है। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और खनिज विभाग को जानकारी होने के बावजूद भी इस पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जान कर भी अधिकारी कर्मचारी अनजान बने है आखिर क्यों। ये बरबसपुर और बडग़ांव के रेत घाट से होने वाले अवैध रेत के परिवहन क्यों नहीं इन अधिकारियों को दिख रहे है। खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार बहरहाल बरबसपुर, बडग़ांव, मुडियाडीह, पासिद और बल्दीडीह के रेत घाट को प्रशासनिक स्वीकृति रेत उत्खन्न के लिए मिली है जिन्हें उच्चन्यायालय के आदेश तक 15 अक्टूबर तक बंद रखा जाना है। चेन माउंटेन, पुकलेन, जेसीबी से हो रहा है रेख का अवैध उत्खन्न। कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर आम जनता को गुमराह कर रहे है अधिकारी कर्मचारी।
गौरतलब है कि शहर से लगा ग्राम बरसपुर और बडग़ांव, में रोजाना हजारों ट्रीप हाईवा से रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है और ये अवैध परिवहन खुले आम चल रहा है। जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित खनिज विभाग के सभी आला अधिकारी को इस बात की जानकारी है कि बरबसपुर और बडग़ांव से अवैध रेत के उत्खन्न चल रहे है पर कोई प्रशासनिक अधिकारी इस अवैध रेत के परिवहन पर अंकुश लगाने की बात तो छोड़ों कार्रवाई भी नहीं कर रही है। आखिर क्यों ये कार्रवाई नहीं की जा रही है। आखिर क्या मजबूरी है प्रशासनिक अधिकारियों की, कौन चला रहा है इस रेत घाट को जिसका इतना भय है कि प्रशासनिक अधिकारी भी उन पर हाथ नहीं डाल रहे है। क्या और कुछ मामला है।
खनिज विभाग के आला अधिकारियों को जब इस बात की सूचना दी जाती है कि अवैध रेत का परिवहन किया जा रहा है तो उनका जवाब होता है कि हमारे पास स्टॉप की कमी है। कभी कहते है कि पुलिस प्रशासन उनको बल नहीं देती है इसलिए कार्रवाई नहीं करने जा सकते है। कभी कहते है कि सत्ता पक्ष के नेताओं का इतना दबाव है कि वह कार्रवाई करेंगे तो उनको जिले से हटा अनयंत्र स्थान स्थानांतरित कर दिया जायेगा। पुलिस से शिकायत करो तो उनका कहना है कि ये सब कार्रवाई खनिज विभाग का है वहीं कार्रवाई करेंगे। जब उनको बल की जरूरत हो हम देंगे पर अभी तक खनिज विभाग ने पुलिस प्रशासन को बल उपलब्ध कराने के लिए लिखित रूप से मांग नहीं की है। खनिज अधिकारियों को जब यह जानकारी दी जाती है कि उक्त स्थान पर रेत की अवैध उत्खन्न किया जा रहा है, सूचना जानकर अधिकारी बड़े आश्चर्य से कहते है कि ऐसे का हमें तो पता ही नहीं चलता। अरे भाई आंख जानबूझ कर बंद रखेंगे तो आप को ये अवैध उत्खन्न कैसे दिखेंगे।
अपुष्ट सुत्रों का कहना है कि रेत के खुलेआम अवैध व्यापार करने वालों का खनिज विभाग सहित सभी प्रशासनिक अधिकारी तक गिफ्ट पहुंच रहा है। जिस वजह से वह जानकर भी अनजान बन रहे है। बरबसपुर और बडग़ांव में अब तो यह आलम है कि वहां के कुछ गांव प्रमुख और गांव के लोग मिलकर अवैध उत्खन्न शुरू कर दिये है। पूरे गांव के भीतर हजारों ट्रेक्टर देखने को मिलेगा। महासमुन्द जिले के अलावा इन दोनों गांव में अन्य जिले के भी टे्रक्ट्रर यहां अवैध रेत का उत्खन्न करने पहुंचे है। सडक़ों पर कुछ गांव के युवत प्रत्येक वाहन से हर ट्रिप पर 100 रुपए वसूली करते है। इस तरह इस गांव में रोजाना हजारों ट्रेक्टरों से रेत निकलकर घाट किनारे पहुंच रहा है जिसे हाईवे में भर कर छत्तीसगढ़ प्रदेश सहित अन्य राज्यों तक भेजा जा रहा है। वर्तमान में एक हाईवा रेत की कीमत 20 हजार रुपए बताई जा रही है। इस लिहाज से एक दिन में अगर 500 ट्रिप हाईवा रेत भी निकल रहा है तो लगभग एक करोड़ रुपए की रेत रोज घाट से अवैध रूप से बेचा जा रहा है।
इतने बड़े पैमाने पर रोजाना हो रहे अवैध रेत के उत्खन्न पर शासन प्रशासन का मौन रहना इस बात की ओर शंकेत करता है कि शासन प्रशासन के साथ रेत माफिया साठ गांठ कर इस अवैध रेत के कारोबार को कर रहे है और रोजाना इस अवैध रेत आने वाले करोड़ों रुपए का हिस्सा सब तक पहुंच रहा है। आम जनता को खुलेआम बेवकुफ बनाने का कारोबार प्रशासनिक अधिकारी और माफिया मिलकर कर रहे हैं। महासमुन्द जिले में छत्तीसगढ़ उच्चन्यालय के आदेश की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही है और कानून कायदे की बड़ी-बड़ी बात कर आम जनता को गुमराह करने वाले अधिकारी रातों रात मालामाल हो रहे है।

अमलेन्द्रू मुखर्जी महासमुंद

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