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तानाशाह से मत डरो – 3

आज की कविता

वो बनना चाहता था
4 साल की उम्र में भिश्ती
6 साल की उम्र में पुलिस का सिपाही
8 साल की उम्र में फ़ौजी
10 साल की उम्र में कार मैकेनिक
12 की उम्र में प्रेमी
और 14 की उम्र में सरकारी नौकर
वो अभी तक
कुछ बनना चाहता है
और वो बताता रहता है
कि वो क्या बनना चाहता था
जबकि वो बन चुका है
तानाशाह

सोचो जब तानाशाह नहीं बन सका कुछ
और बस बता कर तसल्ली करता है
तुम उससे डरते हो
आखिर क्या बनोगे तुम?
तानाशाह…??

मयंक
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