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जारी रहेगा सिलगेर का आंदोलन, आज भी जमे है 20 हजार से अधिक की भीड़

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सिलगेर हत्याकांड और जबरदस्ती कैंप लगाने के मामले में आदिवासियों की मांग माने बिना निर्ममता से सरकार अपने कदमों पर अड़ी


अचानक कंटेनमेंट जोन की घोषणा कर सरकार ने रोके देशभर के पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों को और करा लिया घोषणा आंदोलन के खत्म करने का

कंटेनमेंट जोन की घोषणा के बावजूद आज 3 दिन से जमी हुई है सोनी सोरी अपने साथियों के साथ*


सोनी सोरी ने कहा मानसून और कोरोना को देखते हुए आंदोलन खत्म करना जरूरी, इसीलिए समझाया मगर अब आंदोलन जारी रहेगा सुकमा में

बीजापर ( भूमकाल समाचार ) सिलेगर फर्जी मुठभेड़ और आदिवासियों की जमीन पर जबरदस्ती संविधान के विरुद्ध कैंप लगाए जाने के पिछले महीने भर से चला आ रहा आंदोलन आज भी जारी रहा हालांकि आज मीडिया और सोशल मीडिया में यह दुष्प्रचारित किया जाते रहा किया आंदोलन समाप्त हो गया है । अभी-अभी आंदोलन स्थल से आंदोलनरत ग्रामीण तुलसीराम और लखन ने भूमकाल समाचार को फोन कर बताया कि जब तक आदिवासियों की मांगे नहीं मानी जाएगी आंदोलन अनवरत जारी रहेगा और वे भरी बरसात में भी डटे रहेंगे । आज भी आंदोलनकारियों की संख्या बीस हजार से ऊपर बताया जा रहा है । ज्ञात हो कि सरकार की धोखाधड़ी से आक्रोशित ग्रामीणों द्वारा 8 जून को बड़े प्रदर्शन की तैयारी को देखते हुए जिला प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए अकेले उसूर ब्लॉक को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया था ताकि देश के पत्रकार, बुद्धिजीवी, राजनीतिकज्ञ, समाजसेवी सिलगेर की स्थिति देखने के लिए ना पहुंच सके । पूर्व के भाजपा शासन की तरह इस बार कांग्रेस ने भी वही रवैय्या अपनाते हुए अपनी गलती छुपाने के लिए सच जानने की कोशिश करने को बीजापुर से बहुत पहले ही रोकना शुरू कर दिया । इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन की ओर से गई 10 सदस्य समिति को भी बंगा पाल में रोक दिया गया, इसके पहले और बाद में अनेक पत्रकारों सहित भाजपा शिवसेना और अन्य समाजसेवियों के प्रतिनिधिमंडल को भी प्रशासन ने बीजापुर भी नहीं पहुंचने दिया । मगर बस्तर की समाजसेवी सोनी सोरी अपने दो तीन साथियों के साथ सिलगेर में आंदोलनरत ग्रामीणों के पास 2 दिन पहले ही पहुंच चुकी थी । ज्ञात हो कि हां आंदोलनरत ग्रामीण इस बात से आक्रोशित थे कि सरकार द्वारा भेजे गए विधायकों और सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से हुई चर्चा के अनुसार उनको लिखित रूप से प्रशासन ने उस तारीख तक कोई आश्वासन नहीं दिया था और न ही और कोई पहल की थी । बाद में आदिवासी नेत्री सोनी सोढ़ी की पहल पर कुछ आंदोलनरत आदिवासी कलेक्टर से मिलने के लिए तैयार हुए और कलेक्टर से उन्होंने चर्चा किया । चर्चा में क्या निष्कर्ष निकला इसकी उन्होंने किसी भी मीडिया कर्मी के पास स्पष्ट नहीं किया, मगर पूरे देश में उसने घोषणा कर दी कि आंदोलन स्थगित हो गया और अब सिलगेर का आंदोलन सुकमा जिला मुख्यालय में जारी रहेगा । मगर आज भूमकाल समाचार से बात करते हुए आंदोलनरत ग्रामीणों के कई प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन उसी जगह पर लगातार जारी रहेगा जब तक कि उनकी मांगे मान नहीं ली जाती । ग्रामीणों ने आज भी जारी आंदोलन की कुछ तस्वीरें भूमकाल समाचार को भेजी है जिससे इससे स्पष्ट है कि हजारों की संख्या में ग्रामीण अभी भी भारी बरसात के बीच भी सिलगेर और तर्रेम के बीच में डटे हुए हैं ।

हालांकि अभी भी सोनी सोरी और उनकी टीम वहां जमी हुई है और ग्रामीणों को आंदोलन समाप्त करने के लिए मना रही है । इधर कल सन्ध्या जिस समय सोनी सोरी ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की, उसी समय छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन की समिति आलोक शुक्ला, संजय पराते और बेला भाटिया के नेतृत्व में मुख्यमंत्री महोदय से सीधे बात करे थे, जहां वे आदिवासियों का मांग पत्र प्रस्तुत कर मुख्यमंत्री से उनसे बात करने के लिए निवेदन कर रहे थे तब मुख्यमंत्री महोदय ने भी उनसे वादा किया था कि वह ग्रामीणों के प्रतिनिधि मंडल से बात करने के लिए तैयार हैं, यह बात समिति के सदस्य संजय पराते ने भूमकाल से कही । इधर सोनी सोरी ने कहा मानसून और कोरोना को देखते हुए आंदोलन खत्म करना जरूरी है, दूर-दूर से ब्राह्मण इस आंदोलन में शामिल होने के लिए आए हुए हैं जबकि अब उनके खेती-बाड़ी का टाइम शुरू हो गया है अतः आंदोलन खत्म करना ही उचित होगा, इसीलिए समझाया मगर अब आंदोलन जारी रहेगा सुकमा में इसी बीच अचानक बीजापुर से आंदोलन स्थगित करने की घोषणा और उसे सुकमा में संचालित करने का निर्णय बड़ा चकित कर देने वाला रहा, ध्यान हो कि अगला आंदोलन स्थल सुकमा लगभग 60 किलोमीटर से ज्यादा है और यही ग्रामीण जब सुकमा के लिये प्रस्थान करेंगे तो रास्ते में दंतेवाड़ा के पुलिस का एरिया में पड़ता है, जहां जंगल में चलने वालों को माओवादी बताकर मुठभेड़ किए जाने और आत्मसमर्पण जबरदस्ती कराने के कई मामले लगातार बढ़ गए हैं । ऐसे में सिलगेर के आंदोलनकारियों का व दूर-दूर के गांव वालों का सुकमा पहुंचकर आंदोलन को संचालित करते रहना संभव नहीं लग रहा है । एक तरह से सिलगेर के आंदोलन को पूरी तरह से समाप्त करने का यह षड्यंत्र ऊपरी स्तर से रचा गया प्रतीत होता है । फिलहाल इन पंक्तियों के लिखे जाने तक हजारों की भीड़ सिलगेर में जमा है, और वे अभी आंदोलन के लिए डटे हुए हैं ।

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