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ग्रीन मैन रमेश अग्रवाल ने प्रदेश के मुखिया को पत्र लिखकर महाजेनको की जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की

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महाराष्ट्र राज्य बिजली उत्पादन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको)को आबंटित कोल ब्लॉक की जनसुनवाई को लेकर तमनार क्षेत्र में भारी विरोध

रायगढ़ :- जिले की निरन्तर गम्भीर होती पर्यावरणीय समश्याओं और निजी कम्पनियों की मनमानियों के विरुद्ध हमेसा से मुखर आवाज उठाने वाले प्रख्यात पर्यावरण विद एवं सामाजिक कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल ने जिला रायगढ़ के गारे पेलामा सेक्टर II कोल ब्लाक के संदर्भ में राज्य हितों की रक्षा हेतु प्रदेश के संवेदनशील मुखिया भूपेश बघेल को पत्र लिखा है। पत्र में आपने मुखिया से
निवेदन किया है कि राज्य के खनिज संशाधनो को अन्य राज्यों को आबंटित किये जाने का आपने हमेशा से विरोध किया है एवं माननीय प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर राज्य के प्राकृतिक संशाधनो को राज्य के हित में ही किये जाने की मांग की थी | अतः आप अपने इसी विचार को ध्यान में रखकर यथा शीघ्र महाजेनको की जनसुनवाई को निरस्त करने की कृपा करें।
अपने पत्र में रमेश अग्रवाल ने मुखिया से यह भी कहा है कि इस तरह की जन सुनवाईयों की आड़ में छत्तीसगढ़ के नागरिकों को उजाड़ कर प्रदुषण की भारी समस्या पैदा कर पूरा लाभ राज्य हितों की कीमत पर अन्य राज्य को दिया जाता रहा है | आप हमेशा से छत्तीसगढ़ राज्य के हितों के समर्थक रहें हैं | अतः आपसे अपेक्षा है कि आप इस शोषण के दुश्चक्र को समाप्त करने आवश्यक कदम उठायेंगें | छत्तीसगढ़ राज्य के नये कोल ब्लाकों को खोलने के पूर्व उनका पुनः आबंटन किया जाना चाहिये। मुखिया को लिखे पत्र में रमेश अग्रवाल ने बिंदुवार जानकारियां दी है। उसके अनुसार महाजेनको आबंटित इस कोयला खदान हेतु पूर्व में दिनांक १७.अप्रैल.२०१८ को पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जन सुनवाई का आयोजन किया गया था |
दिनांक १७.अप्रैल.२०१८ को होने वाली जन सुनवाई के पूर्व स्वयं आप तमनार आकर ग्रामीणों के साथ खड़े हुये थे एवं आपके प्रयास से ही तत्समय जन सुनवाई स्थगित कर दी गई थी |
तमनार तहसील में पूर्व से ही सात कोयला खदानें संचालित थी वर्तमान में पांच खदाने संचालित हैं | इसके अलावा ४००० मेगावाट का पावर प्लांट एवं कई कोल वाशरी संचालित हैं |


पूर्व में संचालित कोयला खदानों एवं पावर प्लांट से क्षेत्र के रहवासी बेहद बुरी तरह प्रभावित हुये हैं | पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति के साथ साथ क्षेत्र वासियों को अपनी जमीन भी खोनी पड़ी है | कई तरह की गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं व पीने लायक साफ पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है | इन्ही सब विकट समस्यायों से त्रस्त होकर ग्रामीणों ने क्षेत्र में एक और कोयला खदान खोले जाने को भरपूर विरोध किया था और कर रहे हैं | अब पुनः जिला प्रशासन एवं पर्यावरण बिभाग द्वारा उक्त वृहद् कोयला खदान हेतु जन सुनवाई का आयोजन दिनांक २७.०६.२०१९ को किया गया है जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

यदि ऐसे में एक बार जन सुनवाई की प्रक्रिया पूर्ण हो गई तो खदान खुलने से रोकना असंभव हो जाएगा |
वैसे भी यह जनसुनवाई पूर्व में और वर्तमान में भी विधि-विरुध है । इस विषय में केन्द्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली से लेकर श्रीमान कलेक्टर रायगढ़ को भी दिनांक २७.मई.२०१९ को अवगत करवा दिया गया है | रमेश अग्रवाल मुखिया को लिखे अपने पत्र के सांथ उक्त पत्र को (सुलभ संदर्भ हेतु २७.मई.२०१९) प्रेषित किया है |


रमेश अग्रवाल की माने तो मुखिया भूपेश बघेल से सम्पूर्ण तमनार क्षेत्र के आदिवासी व गैर आदिवासी ग्रामीण आशा करते हैं, कि वो एक बार फिर से उनके साथ खड़े होंगे तथा जन सुनवाई निरस्त करवा कर उन्हें इस विकट समस्या से मुक्ति दिलायेंगे |

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