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एम्स के डॉ. करण पिपरे पर कार्यवाही की मांग की माकपा ने, पूछा : पिपरे का दावा सही या विधानसभा की जानकारी, सरकार स्पष्ट करे अपना रुख!

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संजय पराते

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने एम्स के डॉ. करण पीपरे पर चिकित्सा विज्ञान की जगह तंत्र-मंत्र आधारित अंधविश्वास का प्रचार करने के लिए उनकी कड़ी निंदा करते हुए उन पर कार्यवाही करने की मांग एम्स प्रशासन से की है। उनके द्वारा जारी किए गए एक वीडियो के हवाले से, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि एम्स परिसर में गायत्री मंत्र और शिव तांडव के जाप व हवन के कारण एम्स में किसी भी मरीज की मौत कोरोना संक्रमण के कारण नहीं हुई, माकपा ने एम्स प्रशासन से पूछा है कि वह स्पष्ट करें कि पीपरे का दावा सही है या इस सत्र में विधानसभा में कोरोना मौतों के बारे में दी गई जानकारी?

आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिवमंडल ने कहा है कि एम्स के किसी चिकित्सक को किसी भी पूजा-पद्धति पर विश्वास करने का व्यक्तिगत हक़ है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ जाकर सार्वजनिक प्रचार और कार्य करने का कोई अधिकार नहीं है और वास्तव में ऐसे व्यक्ति को तो एम्स में चिकित्सा करने का भी कोई अधिकार नहीं है। एम्स प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे अंधविश्वास भरी अतार्किक बातों के प्रचार के लिए उन्हें वीडियो शूट करने का अधिकार किसने दिया है और किस अधिकार के तहत एम्स प्रशासन उन्हें अपने परिसर में पूजा-पाठ और हवन करने की इजाजत दे रहा है? माकपा ने कहा कि डॉ. पीपरे का वायरल वीडियो प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ताली-थाली बजाकर कोरोना भगाने के हास्यास्पद काम के अनुरूप है, जिससे कारण देश मे कोरोना महामारी का संकट और ज्यादा गहरा गया है।

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार पिछले डेढ़ वर्षों में एम्स में 7810 कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें से 630 मरीजों की मृत्यु हुई है। एम्स में कोरोना से 8% मौतें हुई हैं। अप्रत्यक्ष रूप से डॉ. पीपरे द्वारा यह प्रचारित करना कि कोरोना से होने वाली मौतें चिकित्सा विज्ञान के कारण हुई है और गायत्री और शिव पूजन और हवन से ही मरीज स्वस्थ्य हुए है, घोर आपत्तिजनक व अवैज्ञानिक दावा है। उन्होंने डॉ. पीपरे द्वारा कोरोना की बीमारी को ‘चाइना वायरस’ बताए जाने की भी तीखी निंदा की तथा कहा कि एक चिकित्सक के रूप में उन्हें मालूम होना चाहिए कि कोई भी महामारी राष्ट्र-राज्य की सीमाओं को नहीं पहचानती।

अपने वायरल वीडियो में डॉ. पीपरे ने उनके कार्य के लिए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से सराहना मिलने का भी दावा किया है। माकपा नेता ने कहा है कि अब प्रदेश की सरकार को उनके इस दावे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह चिकित्सा विज्ञान की जगह ऐसे ऊटपटांग और अतार्किक कामों को बढ़ावा देना चाहती है?

माकपा नेता ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और आईसीएमआर ने हमारे देश में कोरोना की तीसरी लहर आने की स्पष्ट चेतावनी दे दी है, इससे निपटने के लिए वैज्ञानिक चिकित्सकीय तैयारी करने के बजाए एम्स जैसा प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शोध संस्थान अपने चिकित्सकों को ऐसे अंधविश्वासपूर्ण और अतार्किक प्रचार की इजाजत देता है, तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात और कुछ नहीं हो सकती। उन्होंने डॉ. पीपरे के खिलाफ उल्लेखनीय कार्यवाही की मांग प्रशासन से की है।

संजय पराते

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