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उज्जवला गृह (बिलासपुर) में लड़कियों के साथ बलात्कार होता है, पर पीड़ितों की शिकायत पर कार्यवाही के बजाय उल्टे उन्हें धमकाया जा रहा है, छत्तीसगढ़ सरकार व अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

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बिलासपुर । “संचालकों के द्वारा लड़कियों को ज़बरदस्ती बाहर भेजा जाता है और बलात शारीरिक सम्बन्ध बनाने पर मजबूर किया जाता है”

“संचालक “जितेंद्र मौर्य” ने उज्ज्वला गृह में एक लड़की के साथ बलात्कार किया है”

“जितेंद्र मौर्य के कहने पर उज्ज्वला में रखी गई लड़कियों को रात में नशीली दवाएँ दी जाती हैं। कभी चाय में मिलाकर कभी खाने में मिलाकर”

ज्ञात हो कि सरकंडा थाने में पुलिस के सामने उज्ज्वला होम बिलासपुर की सभी लड़कियों ने ये बात बताई है । पर
संचालकों पर कार्रवाई करने की बजाए “CSP निमिशा पांडे” ने पीड़ित लड़कियों को धमकाकर बयान बदलने को कहा ।

पीड़ित लड़कियों ने टी आइ जे पी गुप्ता को लिखित भी देना चाहा लेकिन टी आइ ने उन्हें भगा दिया आवेदन नहीं लिया

उज्ज्वला में रह रही एक महिला के पिता और पति जब उससे मिलने पहुँचे तो उस महिला और दूसरी महिलाओं ने रोते रोते उनसे मदद माँगी और बचा लेने की गुहार लगाई…पिता और पति ने सरकंडा थाने जाकर मदद भी माँगी लिखित आवेदन भी दिया लेकिन सरकंडा की पुलिस ने उनकी मदद नहीं की

एक एक व्यक्ति का नाम लेकर पीड़ित लड़कियों ने सारी बातें बताई हैं लेकिन सरकंडा पुलिस ने लड़कियों की तरफ़ से जो FIR लिखी है उसमें इन गंभीर घटनाओं का ज़िक्र ही नहीं किया है

सरकंडा “टी आइ जे पी गुप्ता” और “CSP निमिशा पांडे” पीड़ितों के ख़िलाफ़ और आरोपियों के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं….आख़िर ऐसी कौन सी मजबूरी या किस चीज़ का लालच है दोनो पुलिस अधिकारियों को, कि वर्दी के साथ मिली ज़िम्मेदारियों का भी ख़याल नहीं किया जा रहा । पता चला है कि कि इस मामले में इस मामले से जुड़े अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही होने पर सत्ता में शामिल कुछ चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं होता यही वजह है कि किसी ऊपर के आदेश से अधिकारियों पर दबाव बनाया गया है ।

महिलाओं को नोचने वाले दरिंदों को अगर पुलिस ही इस तरह संरक्षण देने लगेगी तो जनता के पास न्याय का क्या रास्ता बचेगा फिर !!

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