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आदिवासियों पर कुत्ते छोड़ रही है पुलिस, कई आदिवासी महिला महिलाएं हुई है घायल, माओवादियों ने किया विरोध

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माओवादी द्वारा जारी वीडियो जिसकी सत्यता की पुष्टि भूमकाल समाचार नहीं करता है

सुकमा ( भूमकाल समाचार ) पुलिस के कृत्य अब आदिवासियों के साथ इतने ज्यादा अमानवीय हो गए हैं कि ऐसा लगता है कि वह आदिवासियों को भारत के नागरिक मानना ही बंद कर चुके हैं । फोटो और साक्ष्य देते हुए माओवादियों ने आरोप लगाया है कि गांव में हमला कर पुलिस, ग्रामीणों को काटने के लिए अपने प्रशिक्षित कुत्तों को खुला छोड़ दे रही है ।


नक्सलियों की क्रिस्टाराम कमेटी ने पर्चा जारी कर कर वीडियो वायरल कर आरोप लगाया है कि पुलिस और डीआरजी के जवान गांव में हमला कर ग्रामीणों को जानमाल का नुकसान पहुंचा रहे हैं । माओवादियों के अनुसार सर्चिंग के बहाने पुलिस के जवान गांव की महिलाओं पर अपने कुत्ते छोड़ दे रहे हैं जिससे 5 से ज्यादा महिलाएं घायल हुई है , जिनमेँ दो की हालत गंभीर बनी हुई है ।
माओवादियों ने पर्चा में आरोप लगाया है कि ग्रामीणों को पकड़कर मारपीट करना महिलाओं के साथ मानवीय व्यवहार करना, ग्रामीणों को जेल भेज देना एकदम आम हो गया है ।

उन्होंने आरोप लगाया है कि क्रिस्टराम थाना के अंतर्गत वेरमामोडी गांव में 1 सितम्बर को हमला कर पुलिस ने आदिवासियों का तीर धनुष और टँगीया लूट लिया । वहीं यहां से वापस लौटते हुए पुलिस ने कोमलपाड़ के दूधी जोगा और हूँगा को कैम्प ले जाकर प्रताड़ित करने , वहीं दूधी कोसी , कोवासी हडमें , मड़कम मंगड़ी, कोवासी मुक्के, मड़कम पोज्जा को पुलिस के कुत्ते द्वारा कटवाए जाने का आरोप लगाया है, इनमे से दो की हालत गम्भीर भी बताया है ।

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