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अफसर शाही के पैने दांत और लपलपाती जीभ : लील गये एक जवान की जिंदगी

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किरीट ठक्कर

गरियाबंद। पिछले सात से आठ महीने के कोरोना काल में जिले में अफसरशाही अपने चरम पर है। लॉक डाऊन के दौरान लोग घरों में रहे , सड़के गालियां सुनी रही , लोग बेरोजगारी की मार झेलते रहे और तमाम जनप्रतिनिधियों के मुंह पर मास्क बंधा रहा। इसका पूरा फायदा अधिकारियों ने उठाया, जिन्होंने कभी भूलवश या गलती से मास्क नही पहना या किसी अधिकारी की नजर में खटकते रहे ऐसे लोगों से इस बेरोजगारी के दौर में मनमाना चालान वसूला गया। जिले में अधिकारीवाद की स्थिति इतनी बदतर है कि इससे ना सिर्फ आम जनता अपितु मातहत भी परेशान हैं। ऐसी ही परेशानी और अत्याचार से हार कर देवभोग तहसील में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 शुभम पात्र ने आत्महत्या कर ली। आलम ये है कि सत्तारूढ़ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भावसिंह साहू को भी कहना पड़ा है कि जिले में अफसरशाही हावी है।
सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के ही वरिष्ठ विधायक धनेंद्र साहू ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान गरियाबंद सिंचाई विभाग में गड़बड़ियों को लेकर ना सिर्फ सवाल उठाये बल्कि जांच की भी मांग की। जिलेभर में अवैध रेत उत्खनन तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा।

शुभम की खुदकुशी के बाद लीपापोती के आरोप

अभी 15 अकटुबर को देवभोग तहसील कार्यालय में पदस्थ लिपिक शुभम पात्र ने आत्महत्या कर ली है। मरने के पहले शुभम ने सुसाईड नोट लिख छोड़ा है। उसने लिखा कि अधिकारियों की प्रताड़ना से मैं हार गया। इस घटना की जितनी निंदा की जाये उतनी कम है। मामले को लेकर लिपिक संघ , ब्राम्हण समाज ,परिजन और जिले की जनता बेहद नाराज हैं , किन्तु इस मौत पर भी अधिकारिवाद हावी है। बताया जाता है कि इस मामले में मैनपुर एसडीएम श्रीमती अंकिता सोम को जांच के आदेश दिये गये, जिस पर सबसे पहले मृतक की माँ ने ही सवाल उठाये , उल्लेखनीय है कि माँ ने आरोप लगाया कि जिस महिला अधिकारी ने शुभम से संलग्नीकरण के बदले 25 हजार रुपये घुस की मांग की उसे ही जांच अधिकारी बनाया गया। शुभम की माँ न्यायिक जांच की मांग कर रही है और लिपिक संघ तहसीलदार पर एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहा है। जानकारों का मानना है कि शुभम आत्महत्या का मामला अपराधिक मामला है इसिलये इसकी जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से ही कराई जानी चाहिए। लिपिक संघ इस मामले में न्यायिक जांच तथा तहसीलदार पर अपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग को लेकर 19 अकटुबर प्रदेश व्यापी आंदोलन की तैय्यारी में है।

छुरा में बीईओ की नियुक्ति पर भी सवालिया निशान

एक और नमूना देखिये , पिछले दिनों छुरा विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी के रिक्त हुये पद पर एक प्रधान पाठक की नियुक्ति कर दी गई। नियमानुसार इस नियुक्ति पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। जिले में जब अनेको हाई स्कूल लेक्चरार प्रिंसीपल पदस्थ है तब एक प्रधान पाठक जिनकी मूल पदस्थापना केराबाहरा मिडिल स्कूल है की नियुक्ति बीईओ छुरा के पद क्यों कर दी गई होगी ?

किरीट ठक्कर

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