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अधिवक्ता शालिनी गेरा और ईशा खंडेलवाल को अधिवक्ता संघ जगदलपुर द्वारा रोक के खिलाफ स्टेटबार कोंसिल ने आदेश पारित किया ,कहा उनकी प्रेक्टिस पर रोक लगाना न्यायोचित नहीं था.

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लाखन सिंह

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ की जानी मानी अधिवक्ता शालिनी गेरा और ईशा खंडेलवाल को 2015 में जगदलपुर के कोर्ट में काम करने से जगदलपुर अधिवक्ता संघ द्वारा रोक लगाने का प्रस्ताव पास किया था ,जिसके खिलाफ दोनों अधिवक्ताओं ने स्टेट बार कोंसिल छत्तीसगढ़ में अपील की थी की न्यायालय विधि व्यवसाय को   रोकना न्यायोचित नहीं हैं.इस अपील को स्वीकार करते हुए बार  स्टेट बार कोंसिल ने   आदेश पारित करते हुए कहा कि अधिवक्ता संघ का आदेश किया कि जिस आधार पर इन्हें प्रेक्टिस करने से रोका गया है वह न्यायोचित नहीं हैं .,दोनों अधिवक्ता स्टेट बार कोंसिल के सदस्य है और यह दोनों विधि व्यवसाय करने के लिए पात्र है , और जिला अधिवक्ता संघ ने जो इनकी प्रेक्टिस पर अंकुश लगाने का प्रस्ताव पास किया है वह निरस्त किया जाता है.

ज्ञात हो की शालिनी गेरा ,ईशा खंडेलवाल और दुसरे अन्य अधिवक्ता जगदलपुर लीगल एड ग्रुप के साथ मिलकर दक्षिण छत्तीसगढ़ क्षेत्र के आदिवासियों के  साथ हो रहे फर्जी मुठभेड़ और मानवाधिकार हनन के केस जिला कोर्ट में जब प्रस्तुत होते थे उस समय अधिवक्ता संघ जगदलपुर और पुलिस द्वरा तैयार किये गए फर्जी ग्रुप तरह तरह से इसे रोकने की कोशिश करते रहे थे,इन्हें कोर्ट में हाजिर होने पर रोकने और गैर क़ानूनी तरीकों से काम में अडंगा लगाते रहे थे. अधिवक्ता संघ ने  वाकायदा एक प्रस्ताव पास करके इन्हें प्रेक्टिस करने पर रोक लगा दी थी .

उस काल में पुलिस ने असामाजिक समूहों को खड़ा करके इनके घर पर हमले करवाए और तो और सुरक्षा बलों ने मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के पुतले भी जलाये .विभिन्न हामलो के बाद जगदलपुर लीगल एड ग्रुप को वहां से वापस होने को मजबूर कर दिया था .

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