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रेत खदान के गुर्गों ने पत्रकारों पर किया हमला

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खेत और झाड़ियों में छिपकर बचाई जान

गरियाबंद जिले के पितईबंद घाट (पैरी नदी) में अवैध रेत खनन की कवरेज करने गए पत्रकारों पर रेत माफियाओं के गुर्गों ने हमला कर दिया। पत्रकारों पर खदान संचालक के 7-8 गुर्गों ने पहले बहस की, फिर उनके कैमरे और पहचान पत्र छीन लिए और मारपीट शुरू कर दी। पत्रकारों को जान बचाने के लिए खेतों और खलिहानों में छिपना पड़ा, जबकि हमलावर बाइक और स्कूटी से उनका पीछा करते रहे।

इस घटना ने एक बार फिर रेत माफियाओं के बढ़ते हौसलों और पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पितईबंद घाट पैरी नदी के किनारे अवैध रेत खनन का प्रमुख केंद्र माना जाता है। गरियाबंद के पत्रकारों ने बताया कि हमलावरों ने धमकी दी कि अगर वे दोबारा खनन स्थल पर आए तो उनकी जान ले ली जाएगी। गरियाबंद के पत्रकारों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है।

गरियाबंद जिले में पैरी और महानदी नदियों के किनारे अवैध रेत खनन लंबे समय से एक बड़ी समस्या है। रेत माफियाओं के इस बेखौफ रवैये से सवाल उठता है कि क्या स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत या निष्क्रियता इसके लिए जिम्मेदार है ? जिले में अवैध रेत खनन के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई का हमेशा अभाव रहा है।

गरियाबंद में पत्रकारों पर हमला न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह रेत माफियाओं के बढ़ते दबदबे और प्रशासनिक कमजोरियों का जीता जागता उदाहरण है। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

(प्रफुल्ल ठाकुर, अध्यक्ष रायपुर प्रेस क्लब के फेसबुक पोस्ट से )

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